Stubble Protection Force : धान की कटाई के सीजन शुरू होते ही सरकार व प्रशासन सतर्क हो गई है। पराली को जलाने से रोकने के लिए जहां कृषि विभाग के अधिकारी व पुलिस विभाग को तैनात किया गया है। वहीं इस बार सरकार ने फैसला लिया है कि ब्लाक स्तर पर पराली सुरक्षा बल तैनात किया जाएगा।
यह पराली सुरक्षा बल अपने क्षेत्र में देर रात तक गश्त करेगा और पराली जलाने से रोकने के लिए निगरानी करेगा। जहां कृषि विभाग के अधिकारी व कर्मचारी सैटेलाइट से मिलने वाली लोकेशन को ऐप के माध्यम से दर्ज करेंगे, वहीं पराली सुरक्षा बल द्वारा ड्रोन से निगरानी की जाएगी और वह अलग से रिपोर्ट बनाकर मुख्यालय को भेजा जाएगा, ताकि पराली जलाने वाले किसानों को तुरंत ही जुर्माना किया जा सके।
यह आदेश मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने वीरवार को पराली जलाने पर रोक लगाने और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए राज्य की कार्य योजना की समीक्षा की।
पराली सुरक्षा बल में यह विभाग होंगे शामिल
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि पराली सुरक्षा बल का गठन किया गया है। इस पराली सुरक्षा बल में पुलिस कर्मियों, कृषि विभाग के अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, नोडल और क्लस्टर अधिकारियों तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को शामिल किया है।
इस पराली सुरक्षा बल पर ड्रोन की व्यवस्था होंगे और वह मौके पर जाकर व ड्रोन से निगरानी करेगा। यह बल जिला और ब्लॉक स्तर पर कार्य करते हुए खेतों में आग लगने की घटनाओं पर कड़ी निगरानी रखेगा और पराली जलाने के खिलाफ कार्रवाई करेगा।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार ने बताया कि राज्य ने देर शाम के समय गश्त तेज करने का भी आदेश दिया है, क्योंकि कुछ किसान खेतों में आग लगने की घटना की सैटेलाइट रिकॉर्डिंग से बचने के लिए अंधेरा होने के बाद धान के अवशेष जलाने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रवर्तन योजना में धान की पराली जलाने के प्रत्येक सत्यापित मामले में तीन कार्रवाइयों का प्रावधान है। इसमें एफआईआर दर्ज करना, चालान जारी करना और किसान के भूमि अभिलेख में “लाल प्रविष्टि” करना। उल्लंघनकर्ताओं से उचित पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति शुल्क भी वसूला जाएगा। जो किसान फसल अवशेष प्रबंधन करेंगे उनको सरकार की तरफ से 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन दिया जाएगा।

