Property Tax : हरियाणा में संपत्ति कर गणना का तरीका बदल जाएगा। वर्ष 2013 की पुरानी स्लैब खत्म होगी। संपत्ति कर तय करने में आकार, उपयोग व संबंधित क्षेत्र का कलेक्टर रेट आधार बनेगा। पहले संपत्ति के आकार, श्रेणी पर कर तय होता था। यूएलबी (अर्बन लोकल बाडी) की नई व्यवस्था में पहले संपत्ति की गणना कीमत निकलेगी।
फिर उस पर निर्धारित दर से कर लगेगा। ऐसे में अधिक कलेक्टर रेट वाले क्षेत्रों में संपत्ति कर की गणना कीमत अधिक होगी। कलेक्टर रेट में बदलाव पर इसका असर पड़ सकता है। सभी नगर निगमों में 30 लाख से अधिक अलग अलग श्रेणी की संपत्ति हैं। नई व्यवस्था लोगों की जेब पर भारी पड़ेगी व निगम की टैक्स रिकवरी चार गुणा से अधिक बढ़ जाएगी।
ऐसे निकलेगी संपत्ति की गणना कीमत
नई व्यवस्था में पहले संपत्ति की गणना कीमत निकाली जाएगी। इसके लिए संपत्ति क्षेत्रफल, क्षेत्र का कलेक्टर रेट व निर्धारित गुणन कारक लिया जाएगा। फिर इस गणना कीमत पर संपत्ति कर की निर्धारित दर लगेगी। फ्लैट व अपार्टमेंट के लिए कारपेट एरिया के आधार पर अलग गणना का प्रविधान है।
कलेक्टर रेट का असर अहम रहेगा
नई व्यवस्था में कलेक्टर रेट संपत्ति अलग-अलग क्षेत्रों में कलेक्टर रेट अलग है। इसमें समय-समय पर बदलाव भी होता है। एएमसी धीरज कुमार ने कहा कि प्रापर्टी टैक्स अब कलेक्टर रेट के मुताबिक निर्धारित होगा। प्रापर्टी टैक्स की पुरानी स्लैब को खत्म कर दी है, नई स्लैब तय है। इसका नोटिफिकेशन आ गया है।
ई-2 श्रेणी में शामिल निगम
फरीदाबाद, गुरुग्राम और मानेसर नगर निगम ए-1 श्रेणी में हैं। यहां आवासीय संपत्तियों पर 0.030 प्रतिशत और गैर आवासीय संपत्तियों पर 0.10 प्रतिशत सालाना दर निर्धारित है।
ई-2 श्रेणी में शामिल निगम
सरकार ने 30 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना में नगर निगमों के लिए नई व्यवस्था तय की है। यमुनानगर-जगाधरी के साथ अंबाला, हिसार, करनाल, पंचकूला, पानीपत, रोहतक और सोनीपत को ई-2 श्रेणी में रखा गया है। इस श्रेणी में आवासीय संपत्तियों पर पूंजीगत मूल्य का 0.029 प्रतिशत और गैर आवासीय संपत्तियों पर 0.09 प्रतिशत सालाना संपत्ति कर निर्धारित है।

