सितंबर महीना बीतने को है और इसके साथ ही मानसून की विदाई का समय भी आ गया है। वहीं इस बार अलनीनो का प्रभाव साफतौर पर देखा गया और हरियाणा के अधिकतर क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हुई है। विशेषकर धान की बेल्ट में इसका प्रतिकूल असर देखा जा रहा है। हालांकि इसके अतिरिक्त कपास बेल्ट में बीच-बीच में हल्की बारिश होने के कारण पैदावार सामान्य रहने की उम्मीद है। लेकिन धान के उत्पादन पर गहरा असर पड़ेगा।
बेशक धान की आवक मंडियों में शुरू हो गई है और किसानों को कहना है कि इस बार धान की पैदावार कम रही है। हालांकि अभी तक धान की खरीद शुरू नहीं हुई है। वहीं मानसून सीजन में बारिश की बात की जाए तो हरियाणा के 12 जिलों में सामान्य बारिश दर्ज की गई है। वहीं हरियाणा प्रदेश के 9 जिले ऐसे हैं, जहां बारिश सामान्य से कम रही है। यानी सिर्फ एक जिला में बारिश सामान्य से अधिक रही है। सितंबर महीने में हरियाणा के मध्य क्षेत्र में अच्छी बारिश होती है, लेकिन इस बार यह भी धोखा दे गई। ऐसे में प्रदेश के सिर्फ 2 जिले पंचकूला और पलवल में सितंबर महीने में अच्छी बारिश हुई है। बाकी हरियाणा में सामान्य से कम ही बारिश रही है।
9वीं बार कम बारिश
हरियाणा में सामान्य से कम बारिश कोई नई बात नहीं है। आंकड़ाें पर नजर डालें तो पता चलता है कि पिछले 25 साल में इस बार 9वीं बार ऐसा मौका आया, जब बारिश सामान्य से कम रही है। यानी मानसून का सीजन सूखा निकल गया। हरियाणा में औसत बारिश करीब 400 एमएम मानी जाती है, लेकिन इस बार 9वीं बार ऐसा मौका आया, जब बारिश 300 एमएम या उससे कम रिकार्ड की गई है।
इससे पहले की बात करें तो वर्ष 2014 में सबसे कम बारिश हुई थी। तब महज 200.1 एमएम बारिश ही हुई थी। हालांकि इससे पहले वर्ष 2002 में 320.5 एमएम बारिश हुई थी। वहीं वर्ष 2006 में बरिश का आंकड़ा 290.6 एमएम ही रह गया। जबकि 2007 में 314.5 एमएम बारिश हुई और 2009 में 290.7 एमएम बारिश दर्ज की गई। इसके बाद 2012 में 277.8 और 2015 में 287.7 एमएम बारिश होने से प्रदेश में सूखा रहा। इसके बाद 2019 में 255 एमएम ही बारिश हुई थी और इस बार यानी 2026 में 317 एमएम बारिश दर्ज हुई है।

