पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने हरियाणा सरकार द्वारा दायर एक लेटर पेटेंट अपील (LPA) का निपटारा करते हुए कर्मचारियों के सेवाओं के नियमितीकरण (पक्का करने) के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
अदालत ने आदेश दिया है कि राज्य सरकार दो महीने के भीतर कानून और सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय सिद्धांतों के अनुसार कर्मचारियों के नियमितीकरण के दावे पर विचार कर उचित फैसला ले।
यह आदेश माननीय न्यायमूर्ति हरसिमरन सिंह सेठी और माननीय न्यायमूर्ति अमरिंदर सिंह ग्रेवाल की पीठ द्वारा ‘हरियाणा राज्य व अन्य बनाम सुखविंदर सिंह व अन्य’ (LPA No. 2097 of 2026) मामले में सुनाया गया।
क्या था मामला?
सिंगल जज की पीठ ने 25 मई 2026 को सुखविंदर सिंह और अन्य द्वारा दायर याचिका (CWP No. 5686 of 2016) में कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके खिलाफ हरियाणा सरकार ने खंडपीठ में अपील (LPA) दायर की।
सुनवाई के दौरान मुख्य मुद्दा यह था कि क्या राज्य सरकार को केवल नियमितीकरण के दावे पर विचार करने का निर्देश दिया जाना चाहिए था, या फिर बिना किसी विचार/समीक्षा के सीधे ही सेवाओं को पक्का किया जाना चाहिए।
पक्षों की सहमति से आदेश में संशोधन
सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से अतिरिक्त मुख्य अधिवक्ता (AAG) सुश्री अनु पाल तथा प्रतिवादियों (कर्मचारियों) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव आत्मा राम उपस्थित हुए। दोनों पक्षों के वकीलों के बीच बनी सहमति के आधार पर हाईकोर्ट ने सिंगल जज के पिछले आदेश में संशोधन किया।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में निम्नलिखित बातें स्पष्ट कीं:
- दावों का मूल्यांकन: राज्य सरकार कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और स्थापित कानूनी सिद्धांतों के आधार पर उनके नियमितीकरण के दावे पर पुनर्विचार करेगी।
- सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन: इस संबंध में निर्णय लेते समय माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) द्वारा तय किए गए कानूनी सिद्धांतों और दिशानिर्देशों को ध्यान में रखा जाएगा।
- हितों की सुरक्षा: यदि कर्मचारियों का दावा नियमानुसार सही पाया जाता है, तो उन्हें नियमितीकरण का लाभ दिया जाएगा। यदि दावा खारिज होता है, तो राज्य सरकार को कारण बताते हुए एक स्पष्ट आदेश (Speaking Order) जारी करना होगा।
- कर्मचारियों का अधिकार: यदि सरकार का फैसला कर्मचारियों के खिलाफ जाता है, तो उनके पास कानूनी रास्ता अपनाने और उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता रहेगी।
समय-सीमा और देरी की छूट
मामले की अपील में हुई 28 दिनों की देरी को अदालत ने स्वीकार करते हुए माफ कर दिया। पीठ ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस आदेश की प्रति प्राप्त होने के दो महीने (2 Months) के भीतर अपनी प्रक्रिया पूरी कर अंतिम निर्णय सुनिश्चित करे।

