वायस ऑफ पानीपत (ब्यूरो)- हरियाणा के झज्जर जिले के मुनीमपुर गांव में रविवार रात एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। गांव के बाहर स्थित एक पुराने और लंबे समय से बंद पड़े कुएं से रात करीब 8 बजे गाय के बछड़े के रंभाने की आवाज सुनाई दी। गांव वालों को पता चला कि बछड़ा कुएं में गिर गया है। उसे बचाने के लिए सबसे पहले दलबीर (41) कुएं में उतरे, लेकिन काफी देर तक जब वे बाहर नहीं आए, तो उन्हें बचाने के लिए नरेंद्र (37) नीचे गए। इसके बाद मोनू और फिर रामू (34) भी एक-एक करके कुएं में उतर गए। लेकिन कुएं के अंदर जहरीली गैस और ऑक्सीजन की भारी कमी होने के कारण चारों लोगों का दम घुटने लगा और वे बेहोश होकर वहीं फंस गए। कुछ देर बाद चारों की मौत हो गई। इनमें से तीन लोग एक ही परिवार के सदस्य थे, जिससे पूरे गांव में मातम छा गया। घटना के बाद गांव वालों ने तुरंत डायल-112, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस को सूचना दी

पंचायत बुलाई गई
गांव वालों ने खुद ही बचाव अभियान शुरू किया। पहले सेप्टिक टैंक की मदद से कुएं का पानी कम किया गया। इसके बाद जेसीबी मशीन से कुएं की दीवार का एक हिस्सा तोड़ा गया, ताकि अंदर भरी जहरीली गैस बाहर निकल सके। देर रात फायर ब्रिगेड के कुछ सुरक्षा मास्क लेकर ग्रामीण ही कुएं में उतरे और लगभग साढ़े तीन घंटे बाद चारों लोगों को बाहर निकाला। ग्रामीणों का दावा है कि जब चारों को बाहर निकाला गया, तब उनकी सांसें चल रही थीं, लेकिन मौके पर मौजूद एंबुलेंस में ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। उनका कहना है कि यदि समय पर ऑक्सीजन और इलाज मिल जाता, तो शायद चारों की जान बच सकती थी। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और इसकी जांच की जा रही है। हादसे के बाद गांव में भारी गुस्सा फैल गया। उन्होंने मांग की कि मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए, प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले और जिन अधिकारियों की लापरवाही से यह हादसा इतना बड़ा बना, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
कई घंटों तक पंचायत और प्रशासन के बीच बातचीत चली। आखिरकार प्रशासन ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 41-41 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार के एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी देने तथा मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीण पोस्टमार्टम के लिए तैयार हो गए।घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस कमिश्नर डॉ. राजश्री सिंह, उपायुक्त वर्षा खंगवाल और अन्य अधिकारी गांव पहुंचे। अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि पुराने कुएं, बोरवेल और बंद स्थानों में बिना सुरक्षा उपकरण और विशेषज्ञ बचाव दल के उतरना बेहद खतरनाक हो सकता है, क्योंकि वहां जहरीली गैस जमा हो सकती है और ऑक्सीजन की कमी के कारण कुछ ही मिनटों में जान जा सकती है।
TEAM VOICE OF PANIPAT

