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September 1, 2026
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महंगाई का बड़ा झटका! खाने-पीने का सामान हुआ और महंगा !

वॉयस ऑफ पानीपत (हिमांशी चावला) – महंगाई की मार झेल रहे लोगों के लिए एक और चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। जून महीने में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.87% पर पहुंच गई है, जो पिछले महीने के 9.68% के मुकाबले ज्यादा है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून में थोक महंगाई पिछले 44 महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। इससे पहले सितंबर 2022 में यह 10.70% दर्ज की गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने 14 जुलाई को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। महंगाई बढ़ने की वजह से रोजमर्रा की जरूरतों के सामान और खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी इसका बड़ा कारण रही है। अमेरीका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में रोजर्मा के समान में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है । इससे पहले कल रिटेल मार्कट के रेट में बढ़ोतरी देखने को मिली है जो की छठे महीने बढ़कर 4.38% तक पहुंच गई है । रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजों के दाम बढ़ गए हैं। इनकी महंगाई 4.99% से बढ़कर 7.00% हो गई है। इनकी महंगाई 4.49% से बढ़कर 6.14% तक पहुंच गई है। पेट्रोल, डीजल और बिजली जैसी चीजों की महंगाई में थोड़ी कमी आई है। इसकी 30.33% से घटकर 27.41%हो गई है। फैक्ट्री में बनने वाले सामानों की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, इनकी महंगाई 7.48% पर ही बनी हुई है। थोक महंगाई (WPI) को मापने के लिए तीन मुख्य हिस्सों को शामिल किया जाता है। इसमें प्राइमरी आर्टिकल्स का हिस्सा 22.62%, फ्यूल एंड पावर का हिस्सा 13.15% और मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स का हिस्सा सबसे ज्यादा 64.23% होता है।
प्राइमरी आर्टिकल्स को चार भागों में बांटा गया है:
फूड आर्टिकल्स
नॉन-फूड आर्टिकल्स
मिनरल्स
क्रूड पेट्रोलियम

थोक महंगाई का आम लोगों पर असर

अगर थोक महंगाई लंबे समय तक ज्यादा बनी रहती है, तो इसका असर कंपनियों और कारोबार पर पड़ता है। सामान बनाने की लागत बढ़ने पर कंपनियां इसकी भरपाई के लिए कीमतें बढ़ा सकती हैं, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। सरकार थोक महंगाई को कम करने के लिए टैक्स में बदलाव कर सकती है। जैसे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो सरकार ईंधन पर लगने वाला टैक्स कम करके लोगों को राहत देने की कोशिश करती है। हालांकि, टैक्स को एक सीमा तक ही कम किया जा सकता है। आलू, अदरक और अन्य खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर रिटेल महंगाई पर भी देखने को मिला है। जून महीने में रिटेल महंगाई बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई, जबकि मई में यह 3.93% थी। वहीं, साल की शुरुआत यानी जनवरी में रिटेल महंगाई 2.74% दर्ज की गई थी। लगातार छह महीनों से रिटेल महंगाई में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे साफ है कि रोजमर्रा की जरूरत की चीजें पहले के मुकाबले महंगी होती जा रही हैं। भारत में महंगाई को दो तरीकों से मापा जाता है। पहली रिटेल महंगाई (CPI), जो आम लोगों द्वारा खरीदे जाने वाले सामान और सेवाओं की कीमतों पर आधारित होती है। दूसरी थोक महंगाई (WPI), जो थोक बाजार में कारोबारियों के बीच होने वाले लेनदेन की कीमतों को दर्शाती है। दोनों इंडेक्स में अलग-अलग वस्तुओं को शामिल किया जाता है, इसलिए इनके आंकड़ों में भी अंतर देखने को मिलता है।

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