केंद्र सरकार ने यूपीआई से 2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर अतिरिक्त चार्ज लगाने की व्यवस्था कर दी है। इस पर हरियाणा में पेट्रोल पंप संचालकों ने बड़ा फैसला लेते हुए तय किया है कि 2000 रुपये से अधिक का पेट्रोल या डीजल कैश में ही दिया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में लोगों की परेशानियां बढ़ सकती हैं।
गौरतलब है कि यूपीआई से भुगतान को लेकर केंद्र सरकार ने नियम बनाया है कि 2000 से अधिक की राशि यूपीआई से भुगतान करने पर पंप संचालक को मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के रूप में 5 रुपये का भुगतान करना होगा। अब हरियाणा के पेट्रोप पंप संचालक इसका विरोध करने लगे हैं। जींद में आल हरियाणा पेट्रोलियम डीलर्स वेलफेयर एसोसिएशन यानी AHPDA ने तय किया है कि अब 2000 रुपये से अधिक का पेट्रोल और डीजल यूपीआई से नहीं दिया जाएगा।
पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के जिला प्रधान राकेश कुमार का कहना है कि करीब 9 साल से कमीशन में वृद्धि नहीं हुई है। ऐसे में पेट्रोल पंप डीलर को 2 से 3 रुपये प्रति लीटर की ही आय होती है। ऐसे में MDR के तहत यूपीआई ट्रांजेक्शन का भुगतान करने से डीलर्स को नुकसान होगा।
करीब डेढ करोड़ लीटर डीजल की खपत
वहीं पेट्रोप पंप डीलर्स का कहना है कि हरियाणा में डीजल की खपत पेट्रोल से कहीं अधिक है। क्योंकि प्रदेश में 4469 पेट्रोल पंप संचालित हैं और इनसे प्रतिदिन करीब 1.5 करोड़ लीटर डीजल की बिक्री की जाती है। वहीं करीब 65 लाख लीटर पेट्रोल इन पेट्रोल पंपों पर बेचा जाता है। वहीं यदि 2000 रुपये से अधिक की ट्रांजक्शन की बात की जाए तो प्रतिदिन की राशि करीब 150 करोड़ रुपये से अधिक होती है। कुल राशि का बड़ा हिस्सा यूपीआई से आता है।
पेट्रोल पंप संचालक रमेश कुमार ने बताया कि यदि कोई ट्रक डीजल लेता है तो चालक अपने मालिक को स्केनर भेजता है और पैसे वहीं से आते हैं। ऐसे में प्रति ट्रांजक्शन 5 रुपये की कटौती उन पर भारी पड़ेगी।
जींद में पेट्रोप पंप डीलर्स एसोसिएशन के प्रधान राकेश कुमार के अनुसार देश के कई राज्यों में भी पेट्रोप पंप संचालक इसका विरोध कर रहे हैं। पेट्रोल पंप संचालकों को यूपीआई से राशि लेने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इस पर MDR पूर्ण रूप से बंद किया जाए। यानी जितनी राशि को पेट्रोल या डीजल वे बेच रहे हैं, वह पूरी राशि संचालकों को मिलनी चाहिए।

