Haryana News: हरियाणा में गेस्ट टीचर्स के नियमितीकरण को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार की अपील का निपटारा करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि यदि गेस्ट टीचर सुप्रीम कोर्ट के मदन सिंह फैसले और राज्य सरकार की तीन वर्ष की नीति के दायरे में आते हैं, तो सरकार दो महीने के भीतर उनके नियमितीकरण पर विचार करे।
सरकार ने हाईकोर्ट की एकल पीठ द्वारा 25 मई को दिए गए उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें गेस्ट टीचर्स को नियमित करने और उन्हें सभी सेवा लाभ देने के निर्देश दिए गए थे। अपील की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दलील दी गई कि एकल पीठ के समक्ष मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य और पूर्व न्यायिक फैसले प्रस्तुत नहीं किए गए थे, जिसके कारण आदेश पारित हुआ। सरकार ने यह भी कहा कि सभी संबंधित पक्षों को पर्याप्त रूप से नहीं सुना गया और आदेश में संशोधन आवश्यक है।
वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि वर्ष 2006 से अब तक हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट गेस्ट टीचर्स से जुड़े कई अहम फैसले दे चुके हैं। उनका आरोप था कि इन फैसलों की जानकारी सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष नहीं रखी गई, जिससे तथ्यों की पूरी तस्वीर सामने नहीं आ सकी।
इसी मामले में दायर एक पुनर्विचार याचिका भी फिलहाल हाईकोर्ट में लंबित है। याचिका में कहा गया है कि विभिन्न न्यायिक आदेशों के अनुसार नियमित भर्ती पूरी होने के बाद गेस्ट टीचर्स को सेवा से मुक्त किया जाना था, लेकिन राज्य सरकार ने वर्ष 2019 में कानून बनाकर उन्हें 58 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा प्रदान कर दी। इस पुनर्विचार याचिका पर अगली सुनवाई 9 सितंबर को निर्धारित है।
2005-06 में शुरू हुई थी गेस्ट टीचर नीति
गौरतलब है कि तत्कालीन हुड्डा सरकार ने वर्ष 2005-06 में सरकारी स्कूलों में तीन महीने के लिए गेस्ट टीचर्स की नियुक्ति की नीति लागू की थी। नियुक्तियों का अधिकार स्कूल प्रमुखों को दिया गया था और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने का प्रावधान रखा गया था। बाद में कई नियुक्तियों में अनियमितताओं के आरोप सामने आए। विभागीय जांच में 719 से अधिक गेस्ट टीचर्स की नियुक्तियों में अनियमितता पाए जाने की बात भी दर्ज की गई थी।

