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September 17, 2021
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बाबरी ध्वंसः 28 साल, 32 आरोपी लेकिन 2300 पन्ने के फैसले में सारे बच गए

वायस ऑफ पानीपत (कुलवन्त सिंह):- बाबरी का विवादित ढांचा ढहाए जाने के मामले में 28 साल बाद आखिरकार फैसला आ गया। लखनऊ में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के जज एसके यादव ने 2300 पन्नों का फैसला देते हुए राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे रहे लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत सभी 32 आरोपियोंं को बरी कर दिया। इस केस में 48 लोगों पर आरोप लगे थे, जिनमें से 16 की मौत हो चुकी है। फैसला सुनाने वाले जज आज ही रिटायर हो रहे हैं।

सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के फैसले की 10 बड़ी बातें-इस मामले में किसी भी तरह की साजिश के सबूत नहीं मिले।ढांचा ढहाने की घटना अचानक हुई थी, यह घटना साजिशन नहीं हुई थी।अज्ञात लोगों ने विवादित ढांचा गिराया। आरोपी बनाए गए लोगों का इस घटना से लेना-देना नहीं था।सीबीआई 32 आरोपियों का गुनाह साबित करते सबूत पेश करने में नाकाम रही।गवाहों के बयानात बताते हैं कि कारसेवा के लिए जुटी भीड़ की नीयत बाबरी ढांचा गिराने की नहीं थी।अशोक सिंघल ढांचा सुरक्षित रखना चाहते थे क्योंकि वहां मूर्तियां थीं।विवादित जगह पर रामलला की मूर्ति मौजूद थी, इसलिए कारसेवक उस ढांचे को गिराते तो मूर्ति को भी नुकसान पहुंचता। कारसेवकों के दोनों हाथ व्यस्त रखने के लिए जल और फूल लाने को कहा गया था।अखबारों में लिखी बातों को सबूत नहीं मान सकते। सबूत के तौर पर कोर्ट को सिर्फ फोटो और वीडियो पेश किए गए।वीडियो टेम्पर्ड थे। उनके बीच-बीच में खबरें थीं, इसलिए इन्हें भरोसा करने लायक सबूत नहीं मान सकते।चार्टशीट में तस्वीरें पेश की गईं, लेकिन इनमें से ज्यादातर के निगेटिव कोर्ट को मुहैया नहीं कराए गए। इसलिए फोटो भी प्रमाणिक सबूत नहीं हैं।

फैसले के बाद दिग्गज क्या बोले?
आडवाणी ने वीडियो मैसेज ने कहा, आज जो कोर्ट का निर्णय आया, वो अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम सबके लिए खुशी का दिन है। समाचार सुना, इसका स्वागत करते हैं। मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। साबित हो गया कि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में कोई साजिश नहीं हुई। तब हमारा कार्यक्रम और रैलियां किसी षड्यंत्र का हिस्सा नहीं थीं। हम खुश हैं। सभी को राम मंदिर निर्माण को लेकर उत्साहित होना चाहिए।

Team Voice of Panipat

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