केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने देशभर के लाखों व्यापारियों को बड़ी राहत दी है। GST में बड़ा बदलाव करने के बाद व्यापारियों का बार-बार रिटर्न भरने का झंझट को खत्म कर दिया है और अब व्यापारियों को साल तीन बार की बजाए साल में केवल एक ही जीएसटी रिटर्न भरना होगा। सरकार के इस फैसले के बाद देश के खुदरा ग्राहक व छोटे दुकानदारों को राहत दी गई है।
नए नियम के लागू होने पर उन्हें साल में एक बार रिटर्न तो हर तीन माह पर जीएसटी भरना होगा। लेकिन, यह सुविधा प्राप्त करने के लिए यह भी जरूरी है कि इस प्रकार के दुकानदारों का सालाना टर्नओवर पांच करोड़ से कम हो। वीरवार को नई दिल्ली में आयोजित जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में खुदरा दुकानदारों के लिए राहत का यह प्रस्ताव रखा गया था। इस प्रस्ताव को काउंसिल ने अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। अगले साल अप्रैल से इस नियम को लागू किया जा सकता है।
16 लाख से ज्यादा व्यापारियों को दी राहत
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के नए आदेश के बाद देश के 16 लाख से अधिक दुकानदारों को बड़ी राहत मिली है। सरकार द्वारा निर्धारित नए नियम के अंतगर्त फिलहाल यह दुकानदार आते हैं। देश में 16 लाख से अधिक ऐसे दुकानदार हैं, जो सिर्फ खुदरा ग्राहकों को सामान बेचते हैं और जिनका सालाना टर्नओवर पांच करोड़ से कम है।
जीएसटी के दायरे में 1.05 करोड़ कारोबारी हैं। इनमें से 16.88 लाख दुकानदार सिर्फ खुदरा ग्राहकों को सामान बेचते हैं, जिनमें 99 प्रतिशत दुकानदारों का टर्नओवर पांच करोड़ से कम है। इस नियम को इसलिए भी लागू करना आसान है, क्योंकि इन दुकानदारों से सिर्फ वैसे ग्राहक सामान खरीदते हैं, जिन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट से कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए ये दुकानदार साल में एक बार ही जीएसटी रिटर्न भरते हैं, तो इससे जीएसटी विभाग को कोई परेशानी नहीं होगी।
पांच करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी पर हो सकती है कैद
जीएसटी कानून के तहत अधिकारियों को दिया गया गिरफ्तार करने का अधिकार भले ही समाप्त कर दिया गया है, लेकिन पांच करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी पर भारतीय न्याय संहिता के तहत मुकदमा चलाया जाएगा और जेल या जुर्माने की सजा हो सकती है। एक करोड़ तक की जीएसटी चोरी में अब दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। यह अदालत पर निर्भर करेगा कि अभियुक्त को सिर्फ जेल की सजा होती है या फिर जुर्माने की या फिर दोनों की।
अगर कोई कारोबारी पाच करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी करता है तो यह जरूरी नहीं है कि उसे जेल या कैद की सजा भुगतनी ही पड़े। अदालत उस पर सिर्फ जुर्माना लगाकर छोड़ सकती है। पांच करोड़ से अधिक और 10 करोड़ से कम की जीएसटी चोरी पर दो साल की कैद की सजा हो सकती है। अदालत चाहे तो इस सजा को छह माह में बदल सकती है या सिर्फ जुर्माना लगाकर ही कारोबारी को रिहा कर सकती है। 10 करोड से अधिक की जीएसटी चोरी पर पांच साल तक की कैद का प्रविधान रखा गया है। यहां अदालत चाहे तो सिर्फ जुर्माना लेकर ही कारोबारी को रिहा कर सकती है।

