केंद्र सरकार द्वारा वस्तु एवं सेवा कर परिषद यानी जीएसटी की 57वीं बैठक में देश के व्यापारियों के दस बड़े फैसले लिए गए है। यह फैसले व्यापारियों को बड़ी राहत देने वाले है। वीरवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई बैठक् में व्यापारियों को राहत देने के लिए जीएसटी की प्रक्रियाओं को सरल बना दिया है।
इसमें सबसे बड़ी राहत व्यापारियों को डरने की जरूरत नहीं पड़ेगी, अब जीएसटी अधिकारियों से मनमानी गिरफ्तारी का अधिकार को पूरी तरह से छीन लिया है। केंद्र सरकार ने कागजी कार्रवाई और इंस्पेक्टर राज को खत्म कर, पूरा सिस्टम डेटा और ऑटोमेशन पर आधारित कर दिया गया है
जीएसटी की बैठक में लिए गए दस बड़े फैसल
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई बैठक में दस बड़े अहम फैसले लिए गए। जीएसटी काउंसिल की यह 57वीं बैठक थी।
जीएसटी रजिस्ट्रेशन के प्रोसेस को किया आसान
जीएसटी काउंसिल की बैठक में रजिस्ट्रेशन के प्रोसेस को आसान बना दिया है। कम जोखिम वाले व्यापारियों को सिस्टम खुद 3 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन दे रहा है। इसमें किसी अफसर का कोई दखल नहीं होता। 61% रजिस्ट्रेशन इसी तरीके से हो रहे हैं। रजिस्ट्रेशन फॉर्म अब और भी आसान होगा। नाम, पते या डायरेक्टर बदलने जैसे बदलावों के आवेदन अब सिस्टम खुद-ब-खुद (ऑटोमैटिक) मंजूर कर लेगा।
रिटर्न की पुरानी गलतियों को सुधारने में छूट
जीएसटी काउंसिल की बैठक में फैसला लिया कि अभी रिटर्न में फर्क होने पर साल में करीब 95,000 नोटिस अपने आप बन जाते हैं, जिनमें से वसूली ना के बराबर (0.08%) है। ये सिर्फ डेटा एंट्री की गलतियां होती हैं। अब अगर कोई बेचने वाला अपने बिल में कोई कमी करता है, तो वह सीधे अपनी सेल्स स्टेटमेंट में बदलाव करेगा और इसका फायदा खरीदार को अपने आप मिल जाएगा। पुरानी गलतियों और गलत भरे गए रजिस्ट्रेशन नंबर को सुधारने की छूट मिलेगी।
अब तीन दिन में जीएसटी का मिलेगा रिफंड
जीएसटी काउंसिल की बैठक में रिफंड को आसान बना दिया है। अब रिफंड क्लेम को स्वीकार करने का समय 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दिया गया है। 90 प्रतिशत मामलों में अब रिफंड कोई अफसर नहीं, बल्कि सिस्टम खुद 3 दिन में पास कर देगा। ‘कैश लेजर’ में पड़ा आपका फालतू पैसा भी पूरी तरह ऑटोमैटिक तरीके से आपके खाते में आ जाएगा।
कानूनी विवाद और नोटिस
जीएसटी काउंसिल में फैसला लिया कि 10,000 रुपए से कम के मामले में कोई नोटिस नहीं भेजा जाएगा। नोटिस भेजने, सुनवाई करने और आदेश देने का एक तय स्टैंडर्ड होगा।
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े फायदे
जीएसटी काउंसिल में फैसला लिया गया कि अगर किसी खरीदार के पास सही बिल है, उसे माल मिल चुका है और उसने पूरा पेमेंट कर दिया है तो उसे बचाने के लिए अफसरों की एक कमेटी बनेगी। यह कमेटी 3 महीने में अपनी रिपोर्ट देगी।
व्यापार और जिंदगी को बनाया जाएगा आसान
जीएसटी काउंसिल में फैसला लिया व्यापार व जिंदगी को आसान बनाया जाएगा। छोटे टैक्सपेयर्स के लिए बिजनेस बंद करने (कैंसिलेशन) का प्रोसेस ऑटोमैटिक होगा। अब आखिरी रिटर्न भरना भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा होगा।
छोटे व्यापारियों को छूट: 5 करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाले व्यापारी, जो सिर्फ सीधे ग्राहकों को माल बेचते हैं, वे अब साल में एक बार रिटर्न भरेंगे और टैक्स तिमाही (Quarterly) जमा करेंगे।
रास्ते में माल की चेकिंग: अब सड़क पर कोई भी अफसर यूं ही गाड़ी नहीं रोक सकेगा। गाड़ी रोकने के लिए जॉइंट कमिश्नर रैंक के अफसर की मंजूरी और पक्की खुफिया जानकारी होनी चाहिए। माल की चेकिंग सिर्फ उसी राज्य में होगी जहां से माल चला है या जहां पहुंचना है। बीच के राज्य (ट्रांजिट स्टेट) रास्ते में गाड़ी नहीं रोक सकेंगे।
गिरफ्तारी, मुकदमा और जुर्माना
जीएसटी काउंसिल में फैसला लिया कि जीएसटी से गिरफ्तारी का अधिकार पूरी तरह हटा दिया गया है। मुकदमा चलाने की सीमा 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए कर दी गई है। सामान्य जुर्माना 25,000 रुपए से घटाकर 10,000 रुपए कर दिया गया है। यह इसलिए मुमकिन हुआ क्योंकि अब सारा खेल डेटा और सिस्टम का है, डराने-धमकाने की जरूरत नहीं रही।
विदेशी क्लाइंट वालों को फायदा
जीएसटी काउंसिल में अगर कोई भारतीय कंपनी विदेश में अपनी ही ब्रांच के जरिए विदेशी क्लाइंट को सर्विस देती है, तो उसे एक्सपोर्ट का फायदा मिलेगा। अगर कोई विदेशी क्लाइंट अपना सामान भारत भेजकर उस पर काम (जैसे टेस्टिंग, रिपेयरिंग, रिसर्च) करवाता है, तो उसे भी सर्विस एक्सपोर्ट माना जाएगा।
ई-कॉमर्स पर छोटे सेलर्स को मिलेगा फायदा
जीएसटी काउंसिल में फैसला लिया गया कि पहले हर राज्य में माल बेचने के लिए वहां ऑफिस दिखाना पड़ता था। अब छोटे सेलर किसी ई-कॉमर्स कंपनी (जैसे अमेजन, फ्लिपकार्ट) के दूसरे राज्य वाले गोदाम को ही अपना पता (प्रिंसिपल प्लेस ऑफ बिजनेस) दिखा सकेंगे। यानी वे अपने ही राज्य में बैठकर पूरे देश में माल बेच सकेंगे। हर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए टैक्स के नियम एक जैसे होंगे, चाहे उनका बिजनेस मॉडल कुछ भी हो।
टैक्स रेट पर क्या हुए बदलाव
जीएसटी काउंसिल की इस बैठक में किसी भी चीज के रेट नहीं बदले गए हैं। रेट बदलने पर विचार अब साल में सिर्फ एक बार एक अलग बैठक में किया जाएगा। फिलहाल पूरा फोकस नियमों की कमियों को दूर करके जीएसटी के प्रोसेस को आसान बनाने पर है।

