IPS Success Story: भरतपुर जिले की कमान संभाल रही प्रीति चंद्र पिछले 18 वर्षों से लोगों को इंसाफ दिलाने और क्राइम को जड़ से खत्म करने की जंग लड़ रही हैं। प्रीति चंद्रा (Preeti Chandra) आईपीएस बनने से पहले शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में भी काम कर चुकी हैं। सख्त मिजाज शैली के लिए जानी जाने वाली आईपीएस प्रीती चंद्र ने अपने 18 साल के कार्यकाल में सामने आई हर चुनौती का मजबूती से सामना किया।
छोटे से गांव से निकला हीरा

आईपीएस अधिकारी प्रीति चंद्रा (IPS Success Story) का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। सीकर जिले के छोटे से गांव कूदन में इनका परिवार खेती-बाड़ी का काम करता था। इन्होंने दसवीं तक की प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से ही ली थी। इसके बाद 12वीं कक्षा की पढ़ाई सीकर जिले के मारू स्कूल से की। वहीं उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रीति ने जयपुर के महारानी कॉलेज में दाखिला लिया था। अपनी पढ़ाई पूरी होने के बाद इन्होंने कुछ समय जयपुर में शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में भी काम किया।
बिना किसी कोचिंग के UPSC क्रेक
प्रीति चंद्रा की कहानी अलग है। इन्होंने बिना किसी कोचिंग सेंटर से कोचिंग लिए अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा को क्रैक कर दिया था। सुविधाओं के अभाव के बावजूद प्रीति चंद्रा (IPS Preeti Chandra success story) की यह सफलता राजस्थान प्रदेश की लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई।

प्रीति चंद्रा ने साल 2008 में बिना किसी कोचिंग के अपने मजबूत इरादों के दम पर UPSC परीक्षा में पहले ही प्रयास में 255वीं रैंक हासिल की। देशभर में प्रीति को 255वीं रैंक मिलने पर आईपीएस अधिकारी बनने का मौका मिला।
चुनौती पूर्ण संघर्षों का सामना
प्रीति चंद्रा बीकानेर जिले की पहली महिला आईपीएस अधिकारी के रूप में भी काम कर चुकी हैं। इन्होंने कोटा जिले में एसीबी में ड्यूटी के दौरान भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए कई कड़े कदम उठाए।
आईपीएस अधिकारी प्रीती चंद्रा के कड़क मिजाज और बेदाग छवि को देखते हुए चंबल के डाकुओं ने डर के मारे इनके सामने सरेंडर कर दिया था।

