हरियाणा में धान खरीद की सीमा बढ़ाने को लेकर केंद्रीय एजेंसी ने दो टूक जवाब दिया है। Food Corporation of India (FCI) ने कहा है कि इस सीजन में 58 लाख टन से ज्यादा धान की खरीद नहीं की जाए। हरियाणा ने केंद्र से 60 लाख टन धान खरीद की अनुमति मांगी थी। प्रदेश के मंत्री कह चुके हैं कि किसानों का दाना-दाना खरीदा जाएगा। अगर मंडियों में आवक तय सीमा से ज्यादा हुई तो राज्य सरकार अतिरिक्त धान की खरीद कैसे करेगी, यह बड़ी चुनौती होगी।
मुख्यमंत्री नायब सैनी, खाद्य मंत्री व अधिकारी धान खरीद की सीमा बढ़ाने व पुराने चावल के उठान को लेकर कई बार दिल्ली के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन केंद्र ने दोनों में से कोई मांग नहीं मानी है। राज्य सरकार बाहरी धान रोकने के लिए सख्ती बरतेगी। इसके लिए पहली बार किसान ऐप के जरिए धान खरीद की जाएगी। यह ऐप 24 सितंबर से शुरू करने की तैयारी है। इसके जरिए किसान मंडी में धान लाने का शेड्यूल खुद एक सप्ताह पहले तय कर सकेंगे।
1 अक्टूबर से खरीद की तैयारी
‘मेरी फसल- मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर मोटा धान बेचने के लिए 23.98 लाख एकड़ का पंजीकरण कराया गया है जबकि बासमती के लिए 10.05 लाख एकड़ का पंजीकरण कराया गया है। 250 मंडियों में 1 अक्टूबर से धान की खरीद शुरू होने की तैयारी है।
ई-खरीद पोर्टल को ‘मेरी फसल- मेरा ब्योरा’ पोर्टल से जोड़ा जाएगा। मंडी में प्रवेश के समय वाहन का नंबर व फोटो लेना होगा। खरीद से पहले आधार कार्ड से सत्यापन किया जाएगा। आढ़ती को भी दो आढ़तियों की गारंटी देनी होगी।
पंजीकृत किसान ही बेच सकेंगे धान
विभाग हर साल की तरह इस बार भी दावा कर रहा है कि बाहरी राज्यों से आने वाले धान पर सख्ती रहेगी। ‘मेरी फसल- मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर पंजीकृत किसानों का ही धान खरीदा जाएगा, लेकिन पिछले साल ही करनाल समेत कई मंडियों में धान घोटाले हुआ था। इससे बचने के लिए अब खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने कृषि विभाग से पिछले तीन साल के प्रति एकड़ औसत उत्पादन का जिलेवार ब्योरा मांगा है, ताकि संभावित उत्पादन का अनुमान लगाया जा सके।
नई व्यवस्था में खरीद एजेंसियों का हिस्सा भी बदला गया है। पहले खाद्य एवं आपूर्ति विभाग 50%, हैफेड 33% और एचएसडब्ल्यूसी 17% खरीद करता था। अब खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और हैफेड को 40-40%, जबकि एचएसडब्ल्यूसी को 20% खरीद की जिम्मेदारी दी गईं हैं।
पुराने चावल के उठान पर नहीं बनी सहमति
धान खरीद से पहले सरकार के सामने पिछले साल के चावल का संकट भी है। प्रदेश के चावल मिल मालिकों के पास करीब 6 लाख टन चावल बकाया बताया गया है। FCI ने अभी तक इसके उठान को लेकर सहमति नहीं दी है। इस मुद्दे पर 3 बैठकें हो चुकी हैं। ऐसे में धान खरीद की सीमा के साथ पुराने चावल के उठान का मुद्दा भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

