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October 5, 2026
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New Highway: देश में सड़क नेटवर्क को मिलेगी नई रफ्तार, NHAI लाएगा 54 हाईवे प्रोजेक्ट्स

New Highway: नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने चालू वित्त वर्ष के दौरान 2,442 किलोमीटर लंबाई वाले 54 हाईवे और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए निविदाएं (टेंडर) आमंत्रित करने की योजना बनाई है। इन परियोजनाओं पर करीब 1.80 लाख करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से देश के सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

हालांकि, यह संख्या NHAI द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए चिन्हित 124 परियोजनाओं की तुलना में कम है। उन परियोजनाओं की कुल लंबाई 6,376 किलोमीटर और अनुमानित लागत 3.45 लाख करोड़ रुपये थी।

इन राज्यों में होंगे नए प्रोजेक्ट्स

NHAI के दस्तावेज के अनुसार, प्रस्तावित 54 परियोजनाएं आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, तमिलनाडु और तेलंगाना में विकसित की जाएंगी। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्यों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित करना और परिवहन अवसंरचना को सुदृढ़ बनाना है।

तीन मॉडल पर होंगे प्रोजेक्ट्स का आवंटन

प्रारंभिक सूची के अनुसार, 54 परियोजनाओं में से 26 को इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल, 21 को हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) और 7 परियोजनाओं को बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल के तहत आवंटित किया जाएगा।

राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में NHAI की अहम भूमिका

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के अधीन कार्यरत NHAI देश में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण का लगभग 45 से 50 प्रतिशत कार्य संभालता है। शेष परियोजनाओं का निर्माण नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NHIDCL), बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) तथा विभिन्न राज्यों के लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा किया जाता है।

क्या हैं EPC, HAM और BOT मॉडल?

भारत में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मुख्य रूप से तीन मॉडल—EPC, HAM और BOT—के माध्यम से विकसित किया जाता है। EPC मॉडल में निर्माण की पूरी जिम्मेदारी सरकार वहन करती है। HAM मॉडल में सरकार और निजी कंपनी संयुक्त रूप से परियोजना की लागत साझा करती हैं। वहीं BOT मॉडल में निजी कंपनी सड़क का निर्माण, संचालन और रखरखाव निर्धारित रियायती अवधि तक करती है तथा इसके बाद परियोजना सरकार को सौंप देती है

BOT परियोजनाओं की रियायती अवधि आमतौर पर 15 से 20 वर्ष और HAM परियोजनाओं की लगभग 15 वर्ष होती है। इस अवधि के दौरान संबंधित सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी रियायत प्राप्त कंपनी की होती है।

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