July 17, 2026
Voice Of Panipat
Big Breaking NewsHaryanaHaryana NewsIndia NewsINFORMATIVELatest NewsPanipatPANIPAT NEWSSPRITUAL

गुरु पूर्णिमा 2026 : 28 या 29 जुलाई .. जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व..

वॉयस ऑफ पानीपत (तमन्ना गोयल) – देशभर में गुरु के प्रति सम्मान और अटूट श्रद्धा का प्रतीक “गुरु पूर्णिमा” का पावन त्योहार हर वर्ष आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा 28 जुलाई 2026 (मंगलवार) की शाम 06:21 से प्रारंभ होकर 29 जुलाई 2026 की रात 08:07 मिनट पर इसका समापन होगा | जिस कारण मुख्य रूप से यह 29 जुलाई को ही मनाई जाएगी।

तिथि और शुभ मुहूर्त:-
इस वर्ष गुरु पूर्णिमा के मुख्य व्रत, पवित्र स्नान-दान और पूजा अनुष्ठान बुधवार को ही संपन्न किए जाएंगे :-

  • पूर्णिमा तिथि का आरंभ:- 28 जुलाई 2026 को शाम 6:18 बजे
  • पूर्णिमा तिथि का समापन:- 29 जुलाई 2026 को रात 8:05 बजे
  • ब्रह्म मुहूर्त:- सुबह 4:17 से 4:59 बजे तक
  • गुरु पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त:- सुबह 5:41 से 9:05 बजे तक
  • संध्याकाल पूजा मुहूर्त:- शाम 7:14 से रात 08:17 बजे तक

गुरु पूर्णिमा का महत्व:-
सनातन धर्म में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊपर माना गया है क्योंकि गुरु ही शिष्य को अज्ञानता के ज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। गुरु पूर्णिमा के ठीक अगले दिन से भगवान शिव का प्रिय पावन सावन का महीना भी शुरू हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ मास की पूर्णिमा के दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था और उन्होंने ही पहली बार चारों वेदों का वर्गीकरण किया और साथ ही उन्होंने महाभारत, 18 पुराणों और ब्रह्मसूत्र की रचना की। इसी कारण से उन्हें मानव जाति का आदिगुरु माना जाता है और इस दिन को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाकर उनके प्रति समर्पण व्यक्त किया जाता है। बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए भी यह बेहद पवित्र है क्योंकि इसी दिन भगवान बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के बाद सारनाथ में अपना पहला उपदेश (धर्मचक्रप्रवर्तन) दिया था।
आषाढ़ महीने की पूर्णिमा का गहरा आध्यात्मिक संबंध है। इस महीने में आकाश बादलों से घिरा होता है जो कि शिष्य के भीतर छिपे अज्ञान और विकारों के प्रतीक है जबकि चंद्रमा गुरु के पूर्ण ज्ञान का प्रतीक है।

गुरु को समर्पित पावन दिन

गुरु पूर्णिमा पर क्या करें:-
इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। पूजा के लिए पीले, सफेद या केसरिया रंग के वस्त्र धारण करें। यदि आपके पास गुरु की तस्वीर है तो उसे चौकी पर स्थापित करें। तस्वीर न होने पर महर्षि वेदव्यास, भगवान शिव या भगवान विष्णु को आदिगुरु मानकर उनकी पूजा करें और उन्हें चंदन का तिलक लगाएं व पीले फूल, फल, और पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं। इस दिन अपने गुरु द्वारा दिए गए दीक्षा मंत्र का माला जाप करें। गुरु मंत्र न होने पर “गुरुर्र्ब्रह्मा गुर्र्विष्णुः गुर्र्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥” मंत्र का जाप करें। साथ ही अपने गुरु के चरण स्पर्श कर उनसे आशीर्वाद लें। इस दिन किसी मंदिर, आश्रम या जरूरतमंदों को दान दें। इस दिन का मुख्य उद्देश्य अज्ञानता के अंधकार से निकलकर ज्ञान के प्रकाश की ओर बढ़ना है।

TEAM VOICE OF PANIPAT

Related posts

अब जनरल डिब्बें में सफर करने वाले यात्रियों को मिलेगा सस्ता खाना

Voice of Panipat

हिमाचल में हरियाणा के टूरिस्ट के साथ बड़ा हा#दसा, ट्रेवल पलटने से 22 लोग घा#यल

Voice of Panipat

अमिताभ बच्चन ने शेयर की नई कविता, पढिए क्या कहा

Voice of Panipat

Leave a Comment