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July 10, 2026
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पुरी रथयात्रा पर विवाद, गजपति महाराज ने PM और राष्ट्रपति को लिखा पत्र

वॉयस ऑफ पानीपत (तमन्ना गोयल) – पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह, जो कि श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (SJTMC) के अध्यक्ष हैं, उन्होंने 8 जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ISKCON द्वारा पारंपरिक तिथियों से अलग समय पर भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा और स्नान यात्रा आयोजित किए जाने पर आपत्ति जताई है और इसमें हस्तक्षेप की मांग की है। महाराज दिव्यसिंह देव जगन्नाथ जी के प्रमुख सेवक माने जाते हैं। और रथ यात्रा के दौरान वे रथों पर सोने की झाडू से बुहारने की पवित्र सेवा (छेरा पंहरा) करते हैं।

दरअसल उनके अनुसार इन आयोजनों को अलग तिथियों पर आयोजित करने से प्राचीन परंपरा प्रभावित होती है और साथ ही भक्तों की भावनाएं आहत होती हैं। उनका कहना है कि इससे प्राचीन परंपरा खत्म हो जाएगी। ISKCON रथयात्रा का आयोजन शास्त्रों के अनुसार न चलकर अलग तारीखों पर कर रहा है।

जगन्नाथ यात्रा का महत्व:-
पुरी की जगन्नाथ यात्रा देश के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में से एक मानी जाती है। इसमें भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा के विग्रहों को विशेष रथों पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया जाता है। पुरी की रथ यात्रा आषाढ़ की द्वितीया तिथि यानी जून-जुलाई में निकाली जाती है। ऐसे में गजपति महाराज ने परंपराओं को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होने वाला 9 दिवसीय उत्सव है। साथ ही महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित प्राचीन ग्रंथ स्कंद पुराण में भी स्वयं भगवान जगन्नाथ ने रथयात्रा और स्नान यात्रा की तिथि बताई है। जिसके विपरीत मनमानी तिथियों पर आयोजन करना परंपराओं के प्रतिकूल है।

वहीं ISKCON का कहना है कि जगन्नाथ संस्कृति का वैश्विक प्रसार करने और स्थानीय परिस्थितियों तथा भक्तों की सुविधाओं को देखते हुए रथयात्रा की तारीखें अलग-अलग की जाती हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस उत्सव में शामिल हो सकें।

हालांकि ये विवाद नया नहीं है। 2024 और 2025 में भी गजपति महाराज ने ISKCON से धार्मिक पंचांग के अनुसार रथयात्रा आयोजित करने का अनुरोध किया था। परंतु अब 2026 में निर्धारित तिथि से हफ्ते पूर्व रथयात्रा आयोजित करने के कारण यह विवाद चर्चा में आया जिसके बाद गजपति महाराज द्वारा राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई गई।

TEAM VOICE OF PANIPAT

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