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May 18, 2022
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नौकरी लगवाने के नाम पर ठगे 38 लाख, पढिये पूरा मामला.

वायस ऑफ पानीपत(देवेंद्र शर्मा)- शिक्षा विभाग में कंप्यूटर आपरेटर की नौकरी लगवाने के नाम पर नौ युवकों से 38 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। ठगी करने वाले आरोपित ने इन युवकों को फर्जी ज्वाइनिंग लेटर भी दिए थे और उनका इंटरव्यू तक कराया। बाद में जब ज्वाइनिंग नहीं मिली, तो आरोपित से पैसा वापस मांगा। आरोपित ने पैसा भी वापस नहीं दिया। परेशान होकर पीड़ितों ने शहर यमुनानगर थाना पुलिस को शिकायत दी। जिस पर केस दर्ज कर लिया गया।

पुलिस को दी शिकायत के मुताबिक, करनाल के गांव बदरपुर निवासी देवी लाल व अंबाला के गांव थंबड निवासी राकेश कुमार इस्जेक कंपनी यमुनानगर में ठेकेदारी का काम करते थे। दोनों यहां रामपुरा कालोनी में किराये के मकान में रह रहे थे। उनके पास सिरसा निवासी गौरव का आना जाना था। फरवरी 2021 में गौरव उनके पास आया। आरोपित ने उन्हें बताया कि उसकी अधिकारियों से अच्छी जान पहचान है। शिक्षा बोर्ड पंचकूला के माध्यम से सरकारी स्कूल में कंप्यूटर आपरेटर की नौकरी लगवा सकता है। वेतन 26 हजार 700 रुपये होगा। जिस पर देवी लाल व राकेश कुमार उसकी बातों में आ गए और नौकरी के लिए तैयार हो गए।

इतना ही नहीं देवी लाल व राकेश कुमार ने अपने कुछ रिश्तेदारों से भी इस संबंध में बात की और आरोपित के पास भेज दिया। गौरव से सभी बाते हो गई। जिस पर गौरव ने उन्हें पंचकूला शिक्षा सदन में बुलाया। जहां पर इंटरव्यू हो रहे थे। वहां पर आरोपित उन्हें अपने साथ लेकर गया और उनके इंटरव्यू कराए। बाद में प्रति व्यक्ति पांच लाख रुपये मांगे। एकदम से इतने पैसे देने के लिए देवी लाल व उनके रिश्तेदार तैयार नहीं हुए। जिस पर चार लाख रुपये प्रति व्यक्ति देने की बात तय हुई।

कुछ दिनों बाद आरोपित दोबारा देवी लाल व राकेश कुमार के कमरे पर आया और उन्हें ज्वाइनिंग लेटर भी दिखाए। जिस पर उन्होंने अपने और रिश्तेदार चंडीगढ़ के सेक्टर 40 निवासी पूनम व अन्य से आरोपित को देने के लिए पैसे एकत्र किए। इस तरह से करीब 38 लाख रुपये आरोपित को दे दिए। पैसा लेने के बाद आरोपित ने उन्हें पंचकूला के सेक्टर 11 स्थित भवन में दूसरी मंजिल पर बतौर ट्रेनिंग के लिए बीस दिन तक रखा। वहां पर अन्य लोग भी थे। जो ज्वाइनिंग लेटर आरोपित ने दिया था। वह भी ट्रेनिंग के दौरान जमा करा लिया था। ट्रेनिंग होने के बाद भी जब देवी लाल, राकेश कुमार व उनके रिश्तेदार ड्यूटी पर नहीं गए, तो आरोपित से बात की। वह लाकडाउन लगने की वजह से स्कूल न खुलने का हवाला देता रहा। इस तरह से कई माह बीत गए, तो आरोपित से पैसे वापस मांगे। काफी दबाव पड़ने के बाद आरोपित ने चेक दिए। जब बैंक में चेक लगाए, तो पता लगा कि जिस खाता नंबर के चेक दिए गए हैं। उसमें पैसा नहीं है।

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