HARYANA NEWS: एशियाई खेलों में हरियाणा के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। इसमें में विशेषकर इस बार के खेलों में हरियाणा के छोटे से जिले जींद के खिलाड़ी छाए हुए हैं। तीरंदाजी मुकाबले में जींद के रिटोली गांव की बेटी कीर्ति शर्मा ने स्वर्णिम निशाना लगा कर इतिहास रच दिया है। कीर्ति बेहद साधारण परिवार से आती है।
बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए पिता ने कर्ज लेकर खेल के लिए धनुष खरीदा था। अब एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद कीर्ति के गांव के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। कीर्ति का परिवार खेती – किसानी करता है।

जींद से पानीप रोड पर एक छोटा सा गांव है रिटोली। गांव बेशक छोटा है, लेकिन आज यहां की बेटी ने बड़ी उपलब्धी अपने नाम कर ली है। 2026 के एशियन खेलों में यहां की बेटी कीर्ति ने तीरंदाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत लिया है।
कीर्ति शर्मा ने महिला रिकर्व टीम इवेंट में अपनी टीम के सहयोगियों अंकिता भकत और कुमकुम अनिल मोहोद के साथ सांझेदारी करते हुए दक्षिण कोरिया को फाइनल में हरा दिया। कीर्ति के स्वर्ण पदक जीतने की खबर जैसे ही उसके गांव में पहुंची यहां माहौल पूरी तरह खुशनुमा हो गया। गांव व आसपास के लोग बधाई देने कीर्ति के घर पहुंचने लगे।
जब भावुक हो गई मां

बेटी की इस उपलब्धी पर माता कीर्ति की मां गुड्डी देवी की आंखें मीडिया से बात करते हुए नम हो गई। हालांकि कीर्ति का रूझान शुरू में एथलेटिक्स की ओर था। वह दौड़ लगाती थी। इसके बाद उसके कोच ऊधम सिंह ने प्रतिभा को पहचाना और तीरंदाजी के लिए प्रेरित किया।
कीर्ति की मां ने बताया कि परिवार खेती किसानी करता है। ऐसे में आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। बेटी के खेल के लिए जब धनुष खरीदने की जरूरत पड़ी तो 5000 रुपये में लकड़ी धनुष खरीदना पड़ा। यह पैसे भी उधार लिए थे। इसके बाद बेटी ने खेल में अच्छा करना शुरू किया तो आढ़ती से 55000 रुपये कर्ज लेकर प्रोफेशनल धनुष की व्यवस्था की गई।

3 एकड़ के किसान हैं पिता
कीर्ति के पिता विजय कुमार महज 3 एकड़ के किसान हैं। कीर्ति का चयन भारतीय खेल प्राधिकरण के हजारीबाग केंद्र में हुआ तो नए धनुष की व्यवस्था करनी पड़ी। इसके लिए आढ़ती से 55000 रुपये ब्याज पर लेने पड़े। लेकिन बेटी ने काफी उम्मीद थी। उन्होंने बताया कि बेटी ने इस सफलता के लिए 4 साल से घर को त्याग रखा है।
बेटी ने दी गोल्ड जीतने की खबर, खुशी से भावुक हुए पिता
पिता विजय कुमार ने बताया कि स्वर्ण पदक जीतने की सूचना स्वयं बेटी कीर्ति ने उनको दी। जब कीर्ति का फोन आया तो उसने बताया कि कोरिया को हराकर गोल्ड मेडल जीत लिया। जब बेटी का फोन आया तो पिता खेत में धान की कटाई के लिए तैयारी कर रहे थे।
दादा-दादी की खुशी का नहीं रहा ठिकाना
कीर्ति की इस सफलता को लेकर कीर्ति के दादा रामजवारी और दादी लखपति देवी ने बताया कि उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा है। आज के दौर में यदि बेटियों को मौका मिले तो वे हर जगह स्वयं को साबित कर सकती हैं। छोटे गांवों की गलियों से निकल कर भी विश्व भर मेें सफलता का डंका बजाया जा सकता है।

