Haryana News : हरियाणा में नई आईएमटी बनाने पर सरकार का फोकस है। इसी कड़ी में हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश के 10 गांवों को फ्री जोन से बाहर कर दिया, यानी अब इसमें लोग अपनी मनमर्जी से किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं कर सकते हैं। सरकार द्वारा इसको कंट्रोल एरिया में ला दिया है।
हम बात कर रहे है मतलौडा क्षेत्र की। जहां पर 10 गांवों को फ्री जोन से बाहर कर कंट्रोल्ड एरिया घोषित करते ही 53 से अधिक निर्माणाधीन इंडस्ट्री का कंस्ट्रक्शन रुक गया है। इससे 1,100 करोड़ रुपए से ज्यादा निवेश होना है। इससे कारोबार और रोजगार भी प्रभावित होंगे।
16 सितंबर को गजट नोटिफिकेशन जारी होते ही नगर योजनाकार (डीटीपी) विभाग की टीम इंडस्ट्री में पहुंचने लगी है। जिससे उद्यमियों में रोष है। हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने इसे नोटबंदी जैसा फैसला करार देते हुए विरोध जताया है। उद्यमियों की मांग है कि सीएलयू जैसी जटिल प्रक्रिया थोपने से पहले प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए एक-दो साल का समय दिया जाए।
अब सीएलयू लेने के बाद ही कंस्ट्रक्शन हो सकेगा। नक्शा पास कराना होगा। एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज तो माफ है, दूसरे शुल्क देने होंगे। डीटीपी, इंफोर्समेंट सुमित मलिक ने बताया कि कंट्रोल्ड एरिया में सर्वे शुरू कर दिया गया है।
इस दौरान यह जांच की जाएगी कि कहां पर कितनी इंडस्ट्री का कंस्ट्रक्शन चल रहा है और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है। सर्वे का काम अगले 10 दिनों में पूरा हो जाएगा। इसके बाद संबंधित उद्यमियों को नोटिस जारी किए जाएंगे, जिसके बाद सभी को नियमानुसार सीएलयू लेना होगा।
ये 10 गांव फ्री जोन से बाहर
रेर कलां, धर्मगढ़, बाल जाटान, शेरा, कवी, खंडरा, शादीपुर, थिराना, जोशी और अहमदपुर माजरा। इन सभी गांवों को अब कंट्रोल्ड एरिया में शामिल कर लिया गया है।
यह उद्यमियों से अन्याय, निर्माण का वक्त दिया जाए : विनोद धमीजा
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के चेयरमैन विनोद धमीजा ने कहा कि इन 10 गांवों में 53 से अधिक इंडस्ट्री निर्माणाधीन हैं। एक-एक इंडस्ट्री में 20-20 करोड़ रुपए से ज्यादा का इन्वेस्टे होना है। इससे रोजगार भी मिलेगा और सरकार को रेवेन्यू, लेकिन सरकार ने एक झटके में इन्हें फ्री जोन से बाहर कर दिया। अब डीटीपी विभाग की टीमें इंडस्ट्री में पहुंचने लगी हैं। यह उद्यमियों के साथ सरासर अन्याय है। इस फैसले से उद्यमियों में भारी रोष है और यह तर्कसंगत भी नहीं है। कंस्ट्रक्शन पूरा करने के लिए कम से कम एक-दो साल का समय तो मिलना ही चाहिए।
नोटिफिकेशन के साथ ही सीएलयू का नियम लागू हो गया: डीटीपी
इन्फोर्समेंट डीटीपी सुमित मलिक ने कहा कि फ्री जोन खत्म करने का गजट नोटिफिकेशन जानी होते ही सीएलयू लेने का नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो जाता है। इसमें एक दिन क्या, एक घंटे का भी वक्त नहीं लगता। अब जिस इंडस्ट्री की जो भी स्थिति है, उद्यमियों की सरकार को बताना होगा कि वे क्या बनाने जा रहे हैं और इसके लिए सीएलयू लेना होगा। इसके बाद ही कोई कंस्ट्रक्शन जारी रह सकता है। नियम का पालन नहीं करने पर सीलिंग के साथ-साथ तोड़फोड़ की कार्रवाई भी की जाएगी, क्योंकि अब बिना अनुमति निर्माण करना अवैध कंस्ट्रक्शन की श्रेणी में आएगा।

