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May 21, 2022
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हरियाणा के मानसुन सत्र में पेश हुए 13 विधेयक, लेकिन जिन विधेयकों का इंतजार था, वो पेश नहीं हुए

वायस आफॅ पानीपत (कुलवन्त सिंह)- हरियाणा विधानसभा के एक दिन के मॉनसून सत्र में 12 विधेयक पेश किए गए। लेकिन जिन विधेयकों को लेकर डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने एक दिन पहले ही बयान दिए थे और जिनका प्रदेश की जनता को इंतजार था, वह पेश ही नहीं हुए। इनमें पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं काे 50%, ओबीसी को 8% आरक्षण, सरपंचों को एक साल बाद हटाने के अधिकार वाला राइट-टू रिकॉल, प्राइवेट नौकरियों में स्थानीय युवाओं को 75% आरक्षण संबंधी विधेयक शामिल हैं। 75% आरक्षण जल्द देने की योजना थी, इसलिए कैबिनेट ऑर्डिनेंस लेकर आई और राज्यपाल को भेजा। राज्यपाल ने मंजूरी के लिए राष्ट्रपति को भेज दिया जिससे प्रक्रिया में वक्त लग सकता है। अब सरकार ऑर्डिनेंस को विड्राॅ कर विधानसभा में विधेयक लाएगी ताकि इसे जल्द लागू किया जा सके।

पहले दो दिन का कार्यक्रम जारी हुआ था। लेकिन सीएम, स्पीकर, समेत कई विधायक व सदन के नौ कर्मी संक्रमित मिले, इसलिए सत्र एक दिन का रखा गया। बजट सत्र 4 मार्च को खत्म हुआ था। छह माह में अगला सत्र बुलाना जरूरी होता है। यह अवधि 3 सितंबर को खत्म हो रही थी।

विधानसभा में लाए गए हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास और विनियमन संशोधन विधेयक को लेकर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला में तीखी नोंक-झोंक हुई। करीब तीन घंटे के सत्र में एक घंटे रजिस्ट्री घोटाले पर हंगामा हुआ। कांग्रेस इस विधेयक में संशोधन चाहती थी, जबकि सत्ता पक्ष इसे पास कराने पर अड़ गया। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा ने कहा कि राज्य में रजिस्ट्रियों में घोटाला हुआ है। यह बताएं कि जांच सीबीआई से कराएंगे या सीटिंग जज या फिर विधानसभा की कमेटी से। दुष्यंत चौटाला ने हुड्‌डा पर तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश में सीबीआई इंक्वायरी तो बहुत चल रही है। आपकी कलम पहले पक्की नहीं थी। दिल्ली से चलती थी। सोनिया गांधी ने पेंसिल दी हुई थी। हमारी सरकार में यह गारंटी है कि आपकी तरह दामाद जी दामाद जी करने के बजाय सीधा कार्रवाई होगी।

कृषि योग्य भूमि पर अवैध कॉलोनियों के पनपने का रास्ता बंद करने के लिए हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनिमय (द्वितीय संशोधन व विधिमान्यकरण) विधेयक 2020 पारित किया गया। अब तक दो कनाल कृषि योग्य भूमि से कम की रजिस्ट्री कराने के लिए नगर आयोजना विभाग से एनओसी पत्र लेना होता था। अब एक एकड़ से कम भूमि की रजिस्ट्री कराने के लिए यह एनओसी लेनी होगी। जबकि किसी भी अदालत से पारिवारिक, विरासत, उत्तराधिकार की जमीन के बंटवारे या कानूनी आदेश पर एनओसी लेने की छूट होगी। एनओसी की यह छूट उन पुराने भूखंडों पर भी होगी, जिनके मालिक अपने पूरे मालिकाना हक को बेच रहे हों। किसी भू-मालिक की भूमि से सटी एक एकड़ से कम जमीन की खरीदारी के लिए भी एनओसी की जरूरत नहीं होगी। आवेदन के 14 दिन के अंदर संबंधित विभाग से एनओसी नहीं मिलती है तो भूमि का बिना एनओसी के भी विनिमय हो सकेगा। एक दिन पहले चौटाला ने दावा किया था कि ये विधेयक विधानसभा में पेश किए जाएंगे, लेकिन बुधवार को ये सत्र में नहीं लाए गए। इन तीन विधेयकों के पेश न होने की बड़ी वजह एक दिन का सत्र होना बताया गया। सत्र के शुरू होने से पहले सुबह बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की मीटिंग में ही इन विधेयकों को पेश न करने पर फैसला हो गया था। सत्र भी एक दिन का रखने का फैसला हुआ। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा ने यह बात रखी थी कि यह बड़े विधेयक हैं। इन पर चर्चा जरूरी है।

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