September 16, 2026
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पीएम मोदी ने अबू धाबी में हिंदू मंदिर का किया उद्घाटन

वायस ऑफ पानीपत (सोनम गुप्ता):- प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने अबू धाबी में बोचासनवासी अक्षर पुरूषोत्तम स्वामीनारायण संस्था या बीएपीएस सोसायटी द्वारा निर्मित विशाल हिंदू मंदिर का उद्घाटन किया… पीएम मोदी ने पुजारियों के साथ मदिंर में पूजा- अर्चना भी की.. उद्घाटन के बाद पीएम मोदी ने करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं को पूरा करने” के लिए यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद को धन्यवाद दिया.. यह अबू धाबी में पहला हिंदू पत्थर का मंदिर है जिसमें भारतीय संस्कृति और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की पहचान का अनूठा मिश्रण है. पीएम मोदी ने कहा अगर इस भव्य मंदिर को साकार करने में किसी की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण भूमिका है.. तो वह कोई और नहीं बल्कि मेरे भाई हिज हाइनेस शेख मोहम्मद बिन जायद हैं… उन्होंने कहा यूएई सरकार ने न केवल यूएई में रहने वाले भारतीयों, बल्कि सभी 140 करोड़ भारतीयों का दिल जीता है..

यह मंदिर पश्चिम एशिया में आकार के हिसाब से सबसे बड़ा है.. इस मंदिर के सात शिखर हैं जो सात अमीरातों का प्रतिनिधित्व करते हैं। मंदिर में खाड़ी देश के लिहाज से ऊंटों की नक्काशी और राष्ट्रीय पक्षी बाज भी पत्थरों पर बना है..  दुबई-अबू धाबी शेख जायेद हाइवे पर अल रहबा के पास बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) की ओर से निर्मित यह हिंदू मंदिर करीब 27 एकड़ जमीन पर बना है..  इस मंदिर को बनाने में 700 करोड़ रुपए की लागत लगी है..

अबू धाबी में बीएपीएस हिंदू मंदिर कहां है?

बीएपीएस हिंदू मंदिर अबू धाबी के अबू मरीखा क्षेत्र में एआई टैफ रोड (ई16) और अबू धाबी-घुवेइफात हाईवे (ई11) से पहुंचा जा सकता है। मंदिर अबू धाबी और दुबई के बीच स्थित है।

अबू धाबी में BAPS हिंदू मंदिर निर्माण का उद्देश्य क्या है?

अबू धाबी में बीएपीएस हिंदू मंदिर निर्माण के पीछे का उद्देश्य वैश्विक सद्भाव और सांस्कृतिक आदान-प्रदान है। मंदिर को संयुक्त अरब अमीरात से सपोर्ट मिला है खासकर महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की ओर से। साल 2018 में अबू धाबी के तत्कालीन क्राउन प्रिंस ने इस हिंदू मंदिर के लिए भूमि उपहार में दी थी।

BAPS हिंदू मंदिर निर्माण के लिए पैसे कहां से आये, कितना खर्च हुआ?

BAPS हिंदू मंदिर का निर्माण BAPS द्वारा एक सहयोगात्मक प्रयास रहा है जिसमें विभिन्न समुदायों, भक्तों और वॉलेंटियर्स ने उदारतापूर्वक धन और चीजें दान की। मंदिर के निर्माण में करीब 700 करोड़ रुपये की लागत आई।

पत्थरों को कैसे तराशा और ले जाया गया?

कच्चे पत्थरों को भारत के 5,000 से अधिक कुशल कारीगरों ने सावधानीपूर्वक 30,000 से अधिक टुकड़े में तराशा था। इसमें सबसे छोटे टुकड़े का वजन 1 किलोग्राम और सबसे बड़ा 6 टन से अधिक का था। प्रत्येक पूर्ण टुकड़े पर लेबल लगाया गया था, सावधानीपूर्वक पैक किया गया था और फिर 2,000 किलोमीटर से अधिक दूर अबू धाबी भेजा गया।

TEAM VOICE OF PANIPAT

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