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October 9, 2026
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12वीं तक के स्कूल में 7 कक्षाएं Digital, एडमिशन के लिए पास करना पड़ता है Test

वायस ऑफ पानीपत(देवेंद्र शर्मा)- सरकारी स्कूल का नाम लेते ही लोगों के दिमाग में टूटी-फूटी बिल्डिंग, बैठने के लिए चटाई, टूटा ब्लैक बोर्ड, गंदे बाथरूम, पीने के लिए नल का पानी, अलग-अलग ड्रेस में बच्चे, किताबों का अभाव और अन्य चीजें जेहन में आती हैं, लेकिन पानीपत के गांव काबड़ी का सीनियर सेकेंडरी स्कूल इस सोच को बदल रहा है। वहीं हरियाणा के पानीपत जिले के ग्रामीण आंचल में एक सरकारी स्कूल ऐसा है, जो शहर के प्राइवेट स्कूलों को मात दे रहा है। प्रिंसिपल और टीचर ने सरकारी स्कूल की परिभाषा ही बदल दी है। 12वीं तक के इस स्कूल में 7 कक्षाएं डिजिटल हैं। 2 हजार किताबों की लाइब्रेरी है। पीने के लिए RO का पानी उपलब्ध है। स्कूल की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 16 CCTV कैमरे लगे हुए हैं। बीते चार साल से हर क्लास का रिजल्ट 100 प्रतिशत रहता है।स्कूल में एडमिशन लेने के लिए बच्चों को टेस्ट से गुजरना पड़ता है। इस साल शिक्षक दिवस पर स्कूल के 31 शिक्षकों को सम्मानित किया गया है।

अब तक आपने प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन के लिए टेस्ट की बात सुनी होगी। जबकि सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार प्रभात फेरी और प्रचार-प्रसार कराने के आदेश देती है। लेकिन पानीपत के गांव काबड़ी स्थित सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्रवेश के लिए बच्चों को टेस्ट देना पड़ता है। ऐसा इसलिए क्योंकि गांव का यह स्कूल शिक्षा और सुविधा के मामले में शहर के अच्छे-अच्छे प्राइवेट स्कूलों को मात देता है। 12वीं तक के इस स्कूल की हर कक्षा के 5-5 सेक्शन हैं। स्कूल में बच्चों की संख्या 2700 है। यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों की संख्या भी 97 है, जो जिले के किसी भी स्कूल के शिक्षकों की संख्या से अधिक है

वर्ष 2017 में रणबीर जागलान ने स्कूल के प्रिंसिपल के रूप में चार्ज लिया। तब से अब तक स्कूल को केवल 1.5 लाख रुपए की सरकारी ग्रांट प्राप्त हुई। स्कूल शिक्षक संजीव शास्त्री के सहयोग से बीते 4 साल में करीब 1.5 करोड़ रुपए के विकास कार्य कराए गए। जिसकी बदौलत स्कूल में सुविधाएं बढ़ीं और बच्चों के साथ अभिभावकों का भी स्कूल में विश्वास बढ़ा है। सरकारी स्कूलों में बिजली व्यवस्था की किल्लत होती है। जहां बिजली है भी, वहां पंखे और लाइट की व्यवस्था कम ही देखने को मिलती है, लेकिन काबड़ी स्कूल में बिजली के जरूरी उपकरणों के साथ 24 घंटे बिजली की व्यवस्था है। यहां रिफाइनरी की ओर से 2 सोलर ऊर्जा सिस्टम लगाए गए हैं, ताकि बच्चों को गर्मी और अंधेरे की परेशानी से बचाया जा सके। स्कूलों में छोटे बच्चों के साथ गलत व्यवहार होने की घटनाओं के चलते CCTV कैमरों की मांग की जाती है। इसलिए प्राइवेट स्कूलों ने CCTV कैमरों की व्यवस्था की, लेकिन सरकारी स्कूलों में अभी CCTV कैमरों की कल्पना करना मुश्किल है। काबड़ी के सरकारी स्कूल में 16 CCTV कैमरे लगे हैं।

संभवत यह देश का पहला सरकारी स्कूल है, जहां टेस्ट के बाद बच्चों का एडमिशन होता है। यही कारण है कि इस स्कूल की हर क्लास का रिजल्ट हर वर्ष 100 प्रतिशत रहता है। गांव के साथ स्कूल में शहर के बच्चे भी पढ़ने के लिए आते हैं। प्रिंसिपल रणबीर जागलान ने बताया कि स्कूल का रिजल्ट शत-प्रतिशत रहने और शिक्षा के साथ अन्य गतिविधियों में भी बच्चों के अव्वल आने पर शिक्षक दिवस पर जिला प्रशासन की ओर से स्कूल के 31 शिक्षकों को सम्मानित किया गया है।

काबड़ी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में कक्षा 6 के बाद अंग्रेजी मीडियम से पढ़ने का भी विकल्प है। कक्षा 5 तक हिंदी मीडियम से पढ़ाई कराई जाती है। इसके बाद बच्चे अपनी इच्छा अनुसार अंग्रेजी मीडियम से भी पढ़ाई कर सकते हैं। इसके अलावा ब्यूटी वेलनेस जैसे सब्जेक्ट को पढ़ाने के लिए वोकेशनल टीचर रखे हुए हैं।

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