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लोहे-स्टील के कचरे से बनेंगे हाईवे, ग्रामीण सड़कें और रेलवे ट्रैक, CPCB की गाइडलाइंस

 
लोहे-स्टील के कचरे से बनेंगे हाईवे, ग्रामीण सड़कें और रेलवे ट्रैक, CPCB की गाइडलाइंस

CPCB New Guidline : स्टील और लोहा बनाने वाली भट्टियों से निकलने वाला कचरा (स्लैग) अब पर्यावरण के लिए सिरदर्द बनने के बजाय देश की सड़कें और इमारतें मजबूत करेगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने पायरो-मेटलर्जिकल स्लैग के सुरक्षित प्रबंधन और इस्तेमाल के लिए नई गाइडलाइंस जारी कर दी हैं।

स्टील प्लांट्स अब इस धातु कचरे को खुले में नहीं फेंक सकेंगे, बल्कि इसकी रिसाइकिलिंग और व्यावसायिक इस्तेमाल अनिवार्य होगा। भारत के इस्पात उद्योगों में रोजाना बड़े पैमाने पर उत्पादन से स्लैग का पहाड़ खड़ा हो जाता है, जो सही प्रबंधन न होने पर पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाता है।

अब तक बेकार समझे जाने वाले इस कचरे का उपयोग बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के निर्माण में किया जाएगा। गुजरात के सूरत में इस स्लैग का इस्तेमाल कर देश की पहली सफल सड़क बनाई भी जा चुकी है। सीपीसीबी की इस पहल से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ टिकाऊ विकास को बढ़ावा मिलेगा।

1 टन स्टील में 220 किलो सीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार देश में हर साल करीब 2.4 करोड़ टन कचरा (स्लैग) निकलता है, जो 2030 तक बढ़कर 4.5 से 5 करोड़ टन तक पहुंच सकता है। वर्तमान में स्टील मेकिंग स्लैग करीब 1.2 करोड़ टन निकल रहा है, जो 2030 तक 1.5 से 2 करोड़ तक पैदा होता है कचरा टन हो जाएगा।

ईएएफ और आईएफ स्लैग की मानें तो इनका उत्पादन अभी करीब 50 लाख टन सालाना है, जो 2030 तक 1 करोड़ टन से पार चला जाएगा। एक टन स्टील बनाने के दौरान लगभग 150 से 220 किलोग्राम तक स्लैग पैदा हो जाता है।

पर्यावरण की सुरक्षा होगी जिन प्लांटों में अभी तक खुले और बिना बेस वाले यार्ड में स्लैग फेंका जा रहा है, उन्हें अगले 2 साल के भीतर इन सभी अनियोजित डंपिंग साइट्स को बंद करना होगा। अब नया स्लैग यार्ड जमीन के ऊपर बनेगा, जिसमें कम से कम 600 एमएम मोटी मिट्टी की परत शीट लगाई जाएंगी, ताकि जहरीले तत्व रिसकर जमीन के अंदर न जा सकें।

सड़क और रेल की पटरियां और 1.5 एमएम मोटी जियो-मेम्ब्रेन
इस कचरे से नेशनल हाईवे, ग्रामीण सड़कों और रेलवे ट्रैक के निर्माण में पत्थरों की गिट्टी की जगह स्लैग का इस्तेमाल होगा। सीमेंट इंडस्ट्री में ब्लास्ट फर्नेस स्लैग को पीसकर सीमेंट और कंक्रीट बनाने में उपयोग किया जाएगा, जिससे सीमेंट की मजबूती और बढ़ेगी। सीमेंट कंक्रीट की टाइल्स, पेवर ब्लॉक और ईंटें बनाने में भी यह काम आएगा।

भूजल की निगरानी
प्लांटों को मानसून से पहले और बाद मैं अपने आसपास के भूजल की जांच किसी एनएबीएल मान्यता प्राप्त लैब से करानी होगी और रिपोर्ट राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपनी होगी।

डेडलाइन तयः कंपनियों को नया स्लैग तो हर साल 100 प्रतिशत ठिकाने लगाना ही होगा, साथ ही सालों से जमा पुराना लीगेसी स्लैग भी सितंबर 2025 (आयरन स्लैग) और सितंबर 2027 (स्टील स्लैग) तक पूरी तरह साफ करना होगा।