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2050 तक  शहरों में रहने लगेगी देश की आधी आबादी, मेट्रो रेल और बस प्रणालियों में लगभग 3.7 लाख करोड़ रुपये का भारी निवेश

भारत की जनसंख्या कई दशकों तक बढ़ती रहेगी। उम्मीद है कि 2060 के आसपास जनसंख्या करीब 165 करोड़ पर स्थिर हो जाएगी।
 
2050 तक  शहरों में रहने लगेगी देश की आधी आबादी

भारत को आज भी गांवों का देश कहा जाता है, लेकिन अब अगले कुछ सालों में देश की आधी आबादी शहरों में रहने लगेगी। इसका खुलासा नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने किया। दूसरे राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन के समापन सत्र के दौरान उन्होंने विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए शहरी प्रशासन, योजना और वित्तपोषण में व्यापक सुधारों की तत्काल आवश्यकता को लेकर जानकारी दी।

गौबा ने कहा कि भारत में चल रहे जनसांख्यिकीय और शहरी बदलाव में व्यापक दायरे की जरूरत है। क्योंकि भारत की जनसंख्या कई दशकों तक बढ़ती रहेगी। उम्मीद है कि 2060 के आसपास जनसंख्या करीब 165 करोड़ पर स्थिर हो जाएगी। वहीं 2050 तक भारत की लगभग आधी आबादी के शहरी क्षेत्रों में रहने की उम्मीद है। 

वर्तमान में शहरी जनसंख्या वर्तमान के करीब 50 करोड़ है, जो बढ़ कर 2050 तक 85 करोड़ तक पहुंच जाएगी। ऐसे में शहरी आबादी के लिए बुनियादी ढांचे, आवास और मूलभूत सेवाओं से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए व्यापक योजनाएं बनें। इसके लिए प्रशासन और वित्तपोषण के तरीकों में एक बुनियादी बदलाव लाना होगा।

क्योंकि शहरों में प्रतिभा, पूंजी और विचार एक साथ मिलते हैं। ऐसे में यह आर्थिक केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि भारत में सुनियोजित शहरी बस्तियों का समृद्ध इतिहास होने के बावजूद, आज़ादी के बाद शहरों की काफी हद तक अनदेखी की गई। वहीं 2014 के बाद देश में स्मार्ट सिटीज़, अमृत, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत और शहरी आजीविका मिशन जैसे कई बड़े अभियानों ने इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं। 


शहरी क्षेत्र के लिए बजट आवंटन में 10 गुना की वृद्धि हुई है। मेट्रो रेल और बस प्रणालियों में लगभग 3.7 लाख करोड़ रुपये का भारी निवेश किया गया है। 2025-26 के बजट में शहरों को ग्रोथ हब के रूप में विकसित करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का अर्बन चैलेंज फंड घोषित किया गया है। 

गौबा ने कहा कि नगर निकायों का राजस्व कम बना हुआ है और उन्होंने संपत्ति कर तथा उपयोगकर्ता शुल्क की वसूली में सुधार करना चाहिए। उन्होंने बताया कि हालांकि शहरी स्थानीय निकायों को मिलने वाले केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदान में पिछली आवंटन राशि की तुलना में दोगुने से अधिक की वृद्धि हुई है और उनका हिस्सा 36% से बढ़कर 45% हो गया है।