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Lal Dora : हरियाणा में लाल डोरा की जमीनों की खरीद-बिक्री का सिस्टम बदला, अब लगेगी स्टांप ड्यूटी

 
Lal Dora : हरियाणा में लाल डोरा की जमीनों की खरीद-बिक्री का सिस्टम बदला, अब लगेगी स्टांप ड्यूटी

Haryana Lal Dora Land : हरियाणा में स्वामित्व योजना के तहत लाल डोरा की जमीनों की खरीद-बिक्री का काम अब राजस्व विभाग के हवाले कर दिया गया है। 2020 में योजना लागू होने के समय यह जिम्मेदारी पंचायती राज विभाग और ग्राम सचिवों के पास थी। प्रदेश में इस योजना के तहत 25.16 लाख संपत्तियों की पहचान की गई थी।

स्वामित्व योजना लागू होने से पहले लाल डोरा में जमीन का आधिकारिक रिकॉर्ड, इंतकाल या मालिकाना हक नहीं होता था, जिससे लोग जमीन बेचने या उस पर बैंक लोन लेने में असमर्थ थे। स्वामित्व योजना के अंतर्गत पहचान के बाद पहली रजिस्ट्री मात्र 183 रुपए में की गई थी।

अब लाल डोरा की जमीन दोबारा बेचने पर अन्य संपत्तियों की तरह कलेक्टर रेट के आधार पर पूरा स्टांप शुल्क देना होगा।  विवादों और दावों के निपटारे के लिए सरकार ने पटवारियों को सर्वे ऑफिसर नियुक्त किया है, जो पारिवारिक या संपत्ति से जुड़े झगड़ों को सुलझोंगे। इसके लिए पिछले साल दिसंबर में विधेयक में संशोधन भी किया गया था।

लाल डोरा की जमीन क्या होती है
लाल डोरा की जमीन क्या होती है, इसके बारे में आपको बता दें कि साल 1908 में अंग्रेजों ने गांवों के आवासीय क्षेत्र को कृषि भूमि से अलग करने के लिए मानचित्र पर लाल लकीर खींची थी। इस लकीर के अंदर आने वाली जमीन को 'आबादी' क्षेत्र कहा जाता था। 

इस जमीन को घर बनाने, दुकान चलाने वाली, पशुओं को बांधने वाली, फसल डालने के लिए किया जाने लगा। इसमें किसी तरह का हाउस टैक्स या प्रॉपर्टी टैक्स नहीं लगता था। इस पर निर्माण के लिए किसी तरह के नक्शे आदि पास कराने की भी जरूरत नहीं होती थी। इसी को लाल डोरा की जमीन कहा जाता है। अब सरकार ने लाल डोरा की जमीन की रजिस्ट्रियां शुरू करते हुए मालिकाना हक दे दिया है।