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35 साल सेवा करने वाले कर्मचारी को जज ने खुद गाड़ी चलाकर घर छोड़ा, कोर्ट में भावुक कर गया यह पल

 
35 साल सेवा करने वाले कर्मचारी को जज ने खुद गाड़ी चलाकर घर छोड़ा, कोर्ट में भावुक कर गया यह पल

Haryana news : जिला न्यायालय हिसार में शुक्रवार को एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पद, रुतबे और ओहदों की पारंपरिक दीवारों को दरकिनार कर मानवता और आत्मीयता का एक नया मानक गढ़ दिया। न्यायाधीश आयुष ने अपनी अदालत में वर्षों तक सेवा देने वाले कर्मचारी महावीर सिंह को औपचारिक विदाई देने के बजाय खुद अपनी कार का स्टीयरिंग थामी और रिटायर्ड कर्मचारी को ससम्मान उनके घर तक छोड़ने पहुंचे।

महावीर सिंह ने बताया कि 35 साल की नौकरी में कई जज आए और गए, लेकिन जज आयुष ने उन्हें असाधारण सम्मान दिया। सिंह के अनुसार, जज आयुष ने खुद गाड़ी का दरवाजा खोलकर उन्हें बैठाया और फिर खुद स्टीयरिंग संभालकर उन्हें घर तक छोड़ा। इस घटना से सिंह की आंखें भर आईं। परिजनों ने कहा कि जब सिंह जज की गाड़ी से घर पहुंचे तो परिवार ने इसे गर्व का पल बताया।

आम तौर पर उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच एक औपचारिक दूरी देखी जाती है, लेकिन न्यायाधीश आयुष ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया। रिटायरमेंट के बाद जब विदाई समारोह समाप्त हुआ, तो जज साहब ने महावीर सिंह को खुद अपनी गाड़ी में बैठाया और ड्राइवर की सीट पर खुद विराजमान होकर उनके घर की ओर निकल पड़े।

इस सम्मान को देखकर न केवल महावीर सिंह और उनके परिजन भावुक हो उठे, बल्कि हिसार कोर्ट के वकीलों और अन्य कर्मचारियों के बीच भी यह चर्चा का मुख्य विषय बन गया। व्यवस्था में मानवीय मूल्यों का दिया संदेश कानून की किताबों और मुकदमों की सुनवाई के बीच अक्सर इंसानियत के जज्बे पीछे छूट जाते हैं, लेकिन हिसार कोर्ट के इस वाकये ने साबित कर दिया कि यदि नीयत साफ हो और दिलों में अपने अधीनस्थों के प्रति सम्मान हो, तो पद कोई बाधा नहीं बनता।

न्यायाधीश आयुष का यह कदम न केवल एक समर्पित कर्मचारी के तीन दशकों के परिश्रम का सबसे बड़ा सत्कार है, बल्कि यह पूरी प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा संदेश है कि सहकर्मियों के प्रति आत्मीयता और सम्मान ही सबसे बड़ा मानवीय धर्म है।