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Superhit old Song : बेवफाई पर आज भी याद आ जाता है यह 43 साल पुराना गीत, 1983 की फिल्म का ये गाना बजते ही खिल उठते थे फूल 

1983 में आई फिल्म चटपटी का। बवफाई को लेकर बने गीतों की श्रेणी में रखा जाए तो यह गाना पहला स्थान पा सकता है। इस गाने के बोल हैं, ना ये बेरुखी दिल भुला पाएगा।
 
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Superhit Old Song: भारतीय सिनेमा में जिस प्रकार प्रेम कहानियां काफी लोकप्रिय हुई हैं, ठीक उसी प्रकार प्यार में बेवफाई को लेकर भी काफी मसाला है। विशेषकर कुछ गीतों में प्यार की बेवफाई को बहुत ही रोमांचक और दर्द भरे ढंग से बयान किया है। हिंदी सिनेमा के कई गाने ऐसे हैं, जो वर्षों पुराने होने के बावजूद आज भी किसी बेवफाई पर ताजा हो जाते हैं।
 

ऐसा ही एक गीत है 1983 में आई फिल्म चटपटी का। बवफाई को लेकर बने गीतों की श्रेणी में रखा जाए तो यह गाना पहला स्थान पा सकता है। इस गाने के बोल हैं, ना ये बेरुखी दिल भुला पाएगा। यह गाना आज भी प्यार में धोखा मिलने पर दिल टूटे हुए आशिकों के दर्द की आवाज बनता है। इस गाने को आशा भोसले की आवाज ने तो जादू दिया है, वह सुनते ही बनता है। 

 

दरअसल ना ये बेरुख़ी दिल भुला पाएगा  गाने में आशा भोसले की सुरीली आवाज इसके दर्द को और अधिक बढ़ा देती है। ऐसे में जिसने भी प्यार की बेरुखी को महसूस किया है, वह इसके दर्द को बहुत ही सहजता से महसूस कर सकता है। बेशक यह गाना 43 साल पहले गाया गया, लेकिन आज भी इस गाने के सुनते ही आज भी पुराना प्यार याद हो उठता है। 

 

इस गाने को लिखा था योगेश ने। योगेश की कलम और आशा भोसले की आवाज ने मिलकर जो करिशमा किया है, वह आज भी लाखों दिलों तक पहुंच रहा है। क्योंकि इस गाने में जिस प्रकार जीवन की खुशियाें के दूर जाने से मिलने वाले दर्द को उकेरा गया है, वह अद्भुत है। 


मुक़द्दर ने हमसे हमारी खुशी छीन ली है
हमारे लबों की छलकती हंसी छीन ली है
मुक़द्दर ने हमसे हमारी खुशी छीन ली है
हमारे लबों की छलकती हंसी छीन ली है
ख़बर क्या थी ये गम का तूफ़ां इधर आएगा
ना ये बेरुख़ी दिल भुला पाएगा
गुज़रने को वक़्त भले ही गुज़र जाएगा

ना ये बेरुख़ी दिल भुला पाएगा