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स्कूल छूटने से IPS बनने तक का सफर... सब से अलग है टॉपर माविस टास की सफलता की कहानी

2022 बैच की भारतीय पुलिस सेवा की अधिकारी बनी। वे उत्तर प्रदेश कैडर में कार्यरत हैं। कुछ दिन पहले ही उनकी तैनाती सोनभद्र जिले में अतिरिक्त अधीक्षक यानी ASP के पद पर हुई है।
 
स्कूल छूटने से IPS बनने तक का सफर

UPSC Success Story : सोचिए घर में पैसे की इतनी कमी है कि स्कूल की फीस भी नहीं भर पाएं। परिणाम स्कूल छोड़ना पड़े। इसके बाद फिर से संघर्ष कर खुद को इतना मजबूत किया कि आज आईपीएस बन गईं। यह कहानी है राजस्थान के पाली जिले के फालना की बेटी माविस टास की। उनका जीवन संघर्ष और सफलता के प्रेरणादायक कहानी पेश करता है। 
 


यह कहानी है कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में बतौर एएसपी तैनात आईपीएस अधिकारी माविस टास की। उनके जीवन में बहुत दिक्कतें आई संघर्ष की राह पकड़ी, लेकिन अपने सपनों को कभी धुंधला नहीं होने दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जब माविस टास की स्कूल की पढ़ाई चल रही थी, तब परिवार भीषण आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। परिणाम यह हुआ कि एक साल तक स्कूल ही छोड़ना पड़ा।

 

इसके बावजूद जब मौका मिला तो पढ़ाई शुरू की और लगातार मेहनत की। इतना ही नहीं UPSC की परीक्षा में भी दो बार असफलता मिली, लेकिन हौसला बनाए रखा। परिणाम स्वरूप तीसरे प्रयास में सफलता मिली और मविस टास आईपीएस अधिकारी बन गईं। 

 

मेविस टास इस सफलात के बाद 2022 बैच की भारतीय पुलिस सेवा की अधिकारी बनी। वे उत्तर प्रदेश कैडर में कार्यरत हैं। कुछ दिन पहले ही उनकी तैनाती सोनभद्र जिले में अतिरिक्त अधीक्षक यानी ASP के पद पर हुई है। इस पद तक पहुंचना का सफर जितना संघर्षपूर्ण है, उतना ही प्रेरणादायी भी है। 

 

24 सितंबर, 1996 को राजस्थान के पाली जिले के फालना में जन्मीं मविस टास को शुरू से ही अभाव का जीवन मिला। घर में आर्थिक दिक्कतें थी, ऐसे में उनके पिता ने मुंबई जाकर काम शुरू किया। वहां पर टाइपिंग और अनुवाद जैसे काम करते हुए परिवार को सहारा दिया। यहां से हो रही कमाई परिवार को जीवित तो रख सकती थी, लेकिन बेटी की पढ़ाई का बोझ नहीं उठा पा रहे थे।

 


इसका असर यह हुआ कि मविस कुछ समय के बाद अपने परिवार के साथ मुंबई आ गईं। यहां आकर न्यू कैम्ब्रिज स्कूल और रॉयल कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स में पढ़ाई करे हुए जीवन को आगे बढ़ाया। उन्होंने अलग-अलग कोर्स और पाठ्यक्रमों की पढ़ाई की, जिससे सिविल सेवा परीक्षा के लिए वे तैयार हो गईं।



फिर शुरू हुआ UPSC का सफर

जिस प्रकार शुरूआत जीवन का सफर माविस के लिए आसान नहीं रहा, उसी प्रकार UPSC का सफर भी काफी संघर्षपूर्ण रहा।  क्योंकि उन्होंने पहली बार 2019 में UPSC की परीक्षा दी। यहां असफलता मिली, लेकिन हार नहीं मानी। इसके बाद दोबारा प्रयास किया, लेकिन फिर भी सफलता नहीं मिल पाई। खुद ही पढ़ाई करते हुए तीसरी बार 2021 में अब परीक्षा दी तो उनकी मेहनत रंग लाई ओर 386 वीं रैंक के साथ वे भारतीय पुलिस सेवा के लिए चुनी गईं।