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Success Story : 7 बार मिली असफलता, आठवीं कोशिश में बनी HCS अफसर, गांव लौटी तो पिता से लिपट रो पड़ी अन्नू्

 
Success Story  7 बार मिली हार, आठवीं कोशिश में बनी HCS अफसर, गांव लौटी तो पिता से लिपट रो पड़ी अन्नू्

HCS Annu Success Story : आम तौर पर हम देखते हैं कि सरकारी नौकरी की तैयारी करते समय दो, तीन या चार बार असफल हो जाते हैं तो हम हार मान जाते हैं और किस्मत को दोष देकर तैयारी छोड़ जाते हैं लेकिन कुछ में जुनून होता है और वह सफलता हासिल करने तक हार नहीं मानते। ऐसा ही हुआ है जींद के खरकरामजी गांव की बेटी अन्नू कटारिया के साथ। 

अन्नू कटारिया तीन, चार या पांच बार नहीं बल्कि सात बार असफल हुई लेकिन उसने हार नहीं मानीं और अपने आठवें प्रयास में HCS को क्रैक कर 95वां रैंक हासिल किया। सरकारी स्कूल में पढ़कर बड़ी हुई अन्नू कटारिया की सफलता की कहानी आज दूसरों के लिए प्रेरणा से भरी है। 

जींद के गांव खरकरामजी से दसवीं तक पढ़ाई करने के बाद अन्नू कटारिया ने 12वीं कक्षा में शानदार प्रदर्शन के बूते टॉप किया। इसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी से यूनिवर्सिटी से बीएससी मेडिकल और एमएससी जूलॉजी की पढ़ाई पूरी की। शिक्षा पूरी करने के बाद अन्नू एक निजी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने लगीं। इसी दौरान उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी जारी रखी। नौकरी और पढ़ाई के बीच तालमेल बैठाते हुए उन्होंने अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा।

चार अंकों से चूका सिलेक्शन
अन्नू ने बताया कि HCS परीक्षा के पहले प्रयास में वह केवल चार अंकों से चयन से रह गई थीं। इस नतीजे से उन्हें निराशा जरूर हुई, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमियों को समझा और दोबारा तैयारी शुरू कर दी। प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने खुद पर भरोसा बनाए रखा। इस बार 95वीं रैंक हासिल कर उन्होंने साबित कर दिया कि लगातार मेहनत और धैर्य से मुश्किल लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।

समाज के कुछ लोग देते थे ताने 
अन्नू की सफलता के पीछे उनके परिवार का भी बड़ा योगदान रहा। समाज के कुछ लोगों ने उनके परिवार को पढ़ाई के बजाय बेटी की शादी करने की सलाह दी, लेकिन उनके पिता रघुवीर कटारिया ने बेटी के सपनों का साथ दिया। पिता के इसी विश्वास और सहयोग ने अन्नू को आगे बढ़ने की ताकत दी और अपना लक्ष्य हासिल किया। 

पिता से लिपट रोने लगी अन्नू 
HCS परीक्षा में सफलता के बाद जब अन्नू पहली बार अपने गांव खरकरामजी पहुंचीं तो ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत किया। गांव में उन्हें साफा पहनाकर और फूलों व नोटों की मालाएं डालकर सम्मानित किया गया। जब अन्नू अपने पिता रघुवीर कटारिया से मिलीं तो भावुक हो गईं। पिता के गले लगकर उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।