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दरोगा की बेटी ने रचा इतिहास, पांचवें प्रयास में बनी UPSC टॉपर, मिलिए शक्ति दुबे से

 

UPSC पास करना आसान नहीं होता है। वहीँ आईएएस शक्ति दुबे की यात्रा का सफर भी बिलकुल भी आसान नहीं था। बता दे की उन्हें टॉपर बनने एक दो बार नहीं पुरे 5 बार प्रयास करना पड़ा था। बता दे की शक्ति दुबे उत्तर प्रदेश के प्रयागराज का निवासी है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उनके गाँव में शुरू हुई। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जैव रसायन में स्नातक किया और फिर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से उसी विषय में स्नातकोत्तर किया।

दरोगा की बेटी ने रचा इतिहास, पांचवें प्रयास में बनी UPSC टॉपर, मिलिए शक्ति दुबे से

एक बहुत ही साधारण परिवार से आने वाली शक्ति दुबे बार-बार चुनौतियों को पीछे छोड़कर देश की सबसे कठिन परीक्षा में कैसे टॉप करती है, आइए इसे अपनी यात्रा में बारीकी से समझते हैं।

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उनके पिता यूपी पुलिस में हेड कांस्टेबल हैं। उन्होंने अपने पिता को अपना कर्तव्य निभाते और लोगों की मदद करते देखा। शक्ति ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें लगा कि पुलिस और सरकारी व्यवस्था लोगों को सुरक्षित महसूस करा सकती है।

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वर्ष 2018 से सिविल सेवा की तैयारी की उनकी यात्रा शुरू हुई। यूपीएससी परीक्षा में सिर्फ किताबें पढ़ना ही काफी नहीं है। पाठ्यक्रम को समझना, समसामयिक घटनाओं पर नजर रखना, इसे बार-बार दोहराना और परीक्षा में अपनी जानकारी को सही ढंग से प्रस्तुत करना भी महत्वपूर्ण है।

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UPSC मुख्य परीक्षा के लिए एक वैकल्पिक विषय के रूप में राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंध (पीएसआईआर) को चुना। शक्ति दुबे का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षा में, उम्मीदवार आवश्यक रूप से उसी विषय का चयन नहीं करता है जो उसने कॉलेज में पढ़ा था। विषय में रुचि, इसे समझने की क्षमता और लंबे समय तक अध्ययन करने की तैयारी भी मायने रखती है।

शक्ति दुबे का कहना है कि यूपीएससी की तैयारी करना एक दिवसीय खेल नहीं है। कई चरण हैं और प्रत्येक चरण की अपनी चुनौतियां हैं। उन्हें भी अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए एक से अधिक प्रयास करने पड़े। शुरुआती परिणाम उनके पक्ष में नहीं थे, लेकिन वे अपने लक्ष्य से विचलित नहीं हुई।

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शक्ति दुबे ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 में अखिल भारतीय रैंक टॉपर बनी थी। इस परीक्षा का अंतिम परिणाम 22 अप्रैल, 2025 को घोषित किया गया था। उनका परिणाम उन सभी उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गया जो वर्षों से सिविल सेवाओं में जाने का सपना देख रहे हैं। कई प्रयासों के बाद देश में पहला स्थान हासिल करना कोई आसान काम नहीं है।