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निपुण हरियाणा मिशन की रिपोर्ट में खुलासा : चौथी के बच्चे पढ़ाई में पिछड़े, अंग्रेजी में 47% और गणित में 50% ही दक्ष

 
Revealed in the report of Nipun Haryana Mission Class IV children are lagging behind in studies

जींद : निपुण हरियाणा मिशन के तहत अगस्त में हुई आवधिक आकलन-प्रथम (पीए-1) परीक्षा में जिले के बालवाटिका-3 से चौथी कक्षा तक नामांकित 25,752 बच्चों में से 23,273 का आकलन किया गया। कुल आकलन पूर्णता दर 90.4 प्रतिशत रही। बालवाटिका-3 और शुरुआती कक्षाओं की तुलना में चौथी कक्षा में दक्षता स्तर कम मिला। गणित और अंग्रेजी में विशेष सुधार की जरूरत है।

बालवाटिका-3 में औसत दक्षता 78.9 प्रतिशत, पहली में 75 प्रतिशत, दूसरी में 75.4 प्रतिशत और तीसरी में 69.2 प्रतिशत रही। चौथी कक्षा में यह घटकर 53 प्रतिशत रह गई। पहली कक्षा में गणित, हिंदी और अंग्रेजी का स्तर क्रमशः 80.4, 79.1 और 65.5 प्रतिशत था। दूसरी में अंग्रेजी 79, गणित 77.1 और हिंदी 70 प्रतिशत रही। तीसरी में गणित 74.3, हिंदी 69.8 और अंग्रेजी 63.7 प्रतिशत दर्ज की गई।

चौथी में हिंदी 61.5, गणित 50.2 और अंग्रेजी 47.4 प्रतिशत रही। चौथी कक्षा के गणित में 4,610 बच्चों का आकलन हुआ और 2,618 उत्कृष्ट दक्षता श्रेणी में रहे। आकृतियों, स्थान और सममिति की समझ बेहतर थी, लेकिन प्रतिबिंब और घूर्णन सममिति बनाने का स्तर 35.5 प्रतिशत तथा आकृतियों के पैटर्न पहचानने का 49.1 प्रतिशत रहा।

अंग्रेजी में 4,574 बच्चों में से 2,472 उत्कृष्ट श्रेणी में रहे; 91 बच्चे किसी आकलित दक्षता में सक्षम नहीं पाए गए। कहानी समझने का स्तर 53.7 और विचारों-अनुभवों पर अनुच्छेद लिखने का 41 प्रतिशत रहा। हिंदी में 4,681 बच्चों का आकलन हुआ। संदर्भ से शब्दार्थ समझने की दक्षता 84.2 और विचार क्रम से व्यक्त करने का स्तर 63.2 प्रतिशत था।

तीसरी कक्षा में घटाव की दक्षता 64.3 प्रतिशत, अनुच्छेद पढ़कर समझने की 70.3 प्रतिशत और क्रियाओं व संयोजकों के प्रयोग की 61.1 प्रतिशत रही। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मौखिक पठन प्रवाह में 2,746 बच्चे शामिल हुए, जो नामांकित विद्यार्थियों का 52.6 प्रतिशत था। इनमें 49.3 प्रतिशत बच्चे प्रति मिनट कम से कम 45 और 31 प्रतिशत 60 या अधिक शब्द पढ़ सके। 6.7 प्रतिशत बच्चे प्रति मिनट पांच या उससे कम शब्द पढ़ पाए।


पीए-1 कक्षा तत्परता कार्यक्रम के बाद निर्धारित दक्षताओं और सीखने की कमियों की पहचान के लिए हुआ। रिपोर्ट के आधार पर शिक्षकों को दोबारा शिक्षण, उपचारात्मक अभ्यास, साप्ताहिक प्रगति समीक्षा और स्किल पासबुक में सुधार दर्ज करने की सलाह दी गई है। परिणाम बच्चों की क्षमता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं, लेकिन कमजोर क्षेत्रों और अतिरिक्त सहयोग की जरूरत पहचानने में उपयोगी हैं।
राजेश वशिष्ठ, जिला समन्वयक एफएलएन