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गेहूं की यह किस्म कर देंगी मालामाल, हरियाणा में 15 नवंबर तक करें बिजाई

गेहूं की बिजाई में किसानों को सबसे पहले बीज का चुनाव करना होता है। किस किस्म का बीज प्रयोग किया जा रहा है, इसी पर उत्पादन टिका हुआ है। 
 
गेहूं की यह किस्म कर देंगी मालामाल

Haryana News : हरियाणा मुख्य रूप से कृषि प्रधान राज्य है। इसमें भी रबी की फसल सबसे प्रमुख हाेती है। हरियाणा सबसे अधिक गेहूं का क्षेत्र रहता है। वहीं फिलहाल धान की कटाई का काम पूरा होने को है। ऐसे में गेहूं की बिजाई भी अब रफ्तार पकड़ रही है। गेहूं की बिजाई में किसानों को सबसे पहले बीज का चुनाव करना होता है। किस किस्म का बीज प्रयोग किया जा रहा है, इसी पर उत्पादन टिका हुआ है। 

विशेषज्ञों का कहना है कि के सामने गेहूं की किस्म का चयन सबसे बड़ी चुनौती रहती है। इसके साथ ही गेहूं की बिजाई के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाया जाना चाहिए। इसमें बीज उपचार और खाद प्रबंधन के साथ-साथ खरपतवार नियंत्रण भी काफी अहम है।

जींद के हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं विस्तार संस्थान में तैनात डा. सुभाष चंद्र कहते हैं कि सबसे पहले किसानों को सही समय पर गेहूं की बिजाई करनी चाहिए। इसके साथ ही सही किस्म का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि गेहूं की बिजाई का सही समय 25 अक्टूबर से 15 नवंबर तक होता है। इससे गेहूं की फसल को सही प्रकार से विकसित होने का पूरा समय मिल जाता है।

हालांकि किसी भी कारण से कुछ किसान समय पर बिजाई नहीं कर पाते। ऐसे में उचित किस्म का चयन किया जाना बेहद जरूरी है। बेहतर उत्पादन के लिए जरूरी है कि बिजाई के समय खेत में सही नमी हो। हरियाणा के मौसम और जलवायु के हिसाब से गेहूं की किस्मों की बात की जाए तो DBW 327, DBW 372, DBW 826, DBW 872, DBW 222 और DBW 303 सबसे अच्छी किस्में हैं। 

बीज का उपचार जरूर करें
डा. सुभाष चंद्र के अनुसार बिजाई से पहले बीज उपचार बहुत जरूरी कदम है। इस प्रक्रिया में बीज को बेहतर जमाव मिलता है। जो पूरी फसल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। क्योंकि कई बार बीज में फफूंद जनित बीमारियों से खतरा रहता है। बीज उपचार इससे बचाता है। इसके लिए जरूरी है कि प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से दो ग्राम बाविस्टिन फफूंदनाशक का प्रयोग किया जाना चाहिए। 

संतुलित खाद, उत्पादन का आधार
डा. सुभाष चंद्र बताते हैं कि कुछ किसान अधिक पैदावार के लिए अंधाधुंध खाद का प्रयोग करते हैं। इससे फसल में लाभ नहीं, उल्टा नुकसान होता है। ऐसे में खाद हमेशा ही संतुलित मात्रा में दिया जाना चाहिए। सही तरीका तो मिट्टी की जांच करवा कर जरूरी पोषकतत्वों को पूरा करें। 

फिर भी किसान एक एकड़ में सिर्फ 130 किलोग्राम यूरिया का ही प्रयोग करें। इसके अलावा बैग डीएपी और एक बैग पोटाश जरूर शामिल किया जाना चाहिए। गेहूं में पहली सिंचाई करीब बिजाई के 21 दिन बाद करनी चाहिए। यहां पर फसल की जरूरत के अनुसार यूरिया का प्रयोग किया जाना चाहिए। 

खरपतवार नियंत्रण जरूरी
गेहूं हरियाणा में प्रमुख फसल है। ऐसे में खरपतवार नियंत्रण भी बेहद जरूरी है। डा. सुभाष चंद्र के अनुसार गेहूं की फसल में संकरी पत्ती वाले और चौड़ी पत्ती वाले दोनों ही खरपतवार रहते हैं। ऐसे में इससे बचाव के लिए बिजाई के 72 घंटे के भीतर खरपतवारनाशक अवकीरा का छिड़काव किया जा सकता है।