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हरियाणा में SDM दे सकेंगे दोहलीदारों को जमीन का मालिकाना हक़, सैनी सरकार का बड़ा फेंसला 

Haryana News: दोहलीदार श्रेणी में गरीब ब्राह्मण, पुजारी, पुरोहित के अलावा बुटीमार, भोंडेदार व मुकररीदार आते हैं। इनको दान में मिली हुई जमीन का सरकार ने इनको मालिकाना हक देने का फैसला लिया है।
 
SDM दे सकेंगे दोहलीदारों को जमीन का मालिकाना हक़

Haryana news : हरियाणा सरकार ने दोहलीदारों को जमीन का मालिकाना हक देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत अब दोहलीदारों को मालिकाना हक लेने के लिए जिला उपायुक्त यानी डीसी कार्यालय के चक्कर नहीं काटने होंगे। क्योंकि अब SDM ही इस जमीन का मालिकाना हक दे सकेंगे। 

दरअसल दोहलीदार श्रेणी में गरीब ब्राह्मण, पुजारी, पुरोहित के अलावा बुटीमार, भोंडेदार व मुकररीदार आते हैं। इनको दान में मिली हुई जमीन का सरकार ने इनको मालिकाना हक देने का फैसला लिया है। 20 साल से जो भी दोहलीदार इस जमीन पर काबिज हैं, इस योजना के तहत उनके इस भूमि का मालिकाना दिया जाता है। पहले इसके लिए डीसी यानी जिला उपयुक्त ही सक्षम अधिकारी होते थे। अब सरकार यह मालिकाना कह देने की शक्तियां SDM को दे दी हैं।

दअरसल जिला उपायुक्त कार्यालय पर अतिरिक्त काम का बोझ बढ़ने के कारण यह शक्तियां अब एसडीम को दी गई है। क्योंकि इन लोगों को जमीन का मालिकाना हक लेने के परेशानियां उठानी पड़ रही थी। यह जमीन पुराने समय में गरीब ब्राह्मणों, पुजारियों और पुरोहितों को दान में दी जाती थी। इस जमीन पर वे काश्त कर सकते थे, लेकिन जमीन का मालिकाना हक पंचायत के पास ही होता था। 

इसको लेकर राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त राजस्व एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने आदेश जारी किए हैं। इसके लिए उन सभी एसडीएम को शक्तियां दी गई हैं, जो  सरकार द्वारा राजस्व प्रथम श्रेणी के सहायक कलेक्टर अधिसूचित हैं। अब जो भी पात्र परिवार इस जमीन पर अपना मालिकाना हक लेना चाहते हैं, वे एसडीएम के समक्ष ही आवेदन करेंगे।

मनोहर लाल सरकार ने लिया था फैसला
इसको लेकर हरियाणा में मनोहर लाल के मुख्यमंत्री रहते मालिकाना हक देने का फैसला लिया गया था। इसके तह दोहलीदारों, बूटीमारों, भोंडेदार व मुकररीदार को ऐसी जमीन पर मालिकाना हक देने का फैसला लिया था, जिस पर वे काबिज हैं। हालांकि इस जमीन की खरीद-फरोख्त नहीं की जा सकती है। वहीं 2022 में करनाल में हुए भगवान परशुराम महाकुंभ के दौरान मनोहर लाल मुख्यमंत्री रहते हुए करीब 1700 एकड़ जमीन का मालिकाना हक दोहलीदारों को देने का ऐलान किया था।