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EPFO UPDATE: 30 करोड़ से अधिक कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! बचत पर अब AIF में लगाने की तैयारी

केंद्रीय न्यासी बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाएग। गौरतलब है कि बोर्ड की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया द्वारा की जा रही है।  यदि बोर्ड इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो इसको लेकर आगे की योजना बनेगी।
 
30 करोड़ कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर!

EPFO UPDATE : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO द्वारा बड़ा नीतिगत फैसला लिया गया है। इसके तहत देश भर में EPFO से जुड़े 30 करोड़ से अधिक सदस्यों की बचत को स्टार्टअप और प्राइवेट इक्विटी में निवेश की तैयारी की जा रही है। इसके तहत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन इस बचत राशि को अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड यानी AIF  में निवेश के लिए संगठन के स्तर पर गाइडलाइन तैयार करने में लगा है। 

इसके तहत EPFO द्वारा सदस्यों की ओर से मिलने वाली नई जमा राशि का 3% तक कुछ चयनित AIF में निवेश करने की योजना है।

हालांकि अभी तक इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पाई है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि इसको लेकर निवेश मामलों पर नजर रखने वाली संस्था सेबी की निवेश समिति की बैठक में चर्चा हो चुकी है। 

अगले महीने प्रस्ताव आने की उम्मीद 

इस मुद्दे पर आई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि निवेश संबंधित योजना को अगले महीने यानी नवंबर में प्रस्ताव के लिए लाया जा सकता है।

क्योंकि इस प्रस्ताव को पहले केंद्रीय न्यासी बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाएग। गौरतलब है कि बोर्ड की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया द्वारा की जा रही है।  यदि बोर्ड इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो इसको लेकर आगे की योजना बनेगी।


स्टार्टअप और अन्य विकासशील कारोबारों को मिलेगी पूंजी


कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा जो नई नीति तैयार की जा रही है, इसके तहत स्टार्टअप और अन्य विकासशील कारोबारों को पूंजी उपलब्ध करवाने की योजना है। क्योंकि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO की बात करें तो यह 30 करोड़ से अधिक सदस्यों की करीब 30 लाख करोड़ की रिटायरमेंट बचत का प्रबंधन करता है।

यानी ईपीएफओ द्वारा लिया जा रहा यह फैसला निवेश रणनीति में बड़ा बदलाव साबित होगा। 


सेबी की रजिस्टर्ड श्रेणियों में निवेश की योजना, जोखिम कम

इस पूंजी के निवेश को ईपीएफओ द्वारा  SEBI से रजिस्टर्ड कैटेगरी-I और कैटेगरी-II अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) में करने की योजना है। इससे जोखिम की संभावना कम रहेगी। क्योंकि कैटेगरी-I  के तहत आने वाले फंड को निवेश स्टार्टअप, छोटे कारोबार, इंफ्रास्ट्रक्चर और वेंचर कैपिटल जैसे क्षेत्रों में किया जाता है।  वहीं कैटेगरी-II में प्राइवेट इक्विटी, रियल एस्टेट और प्राइवेट डेट जैसे क्षेत्रों में निवेश का रास्ता खुलता है।