Manisha Bhanwala : पिता की मौत के कुछ घंटे बाद ही मैट पर उतरी थी, विश्व चैंपियन बनकर पूरा किया उनका सपना
Wrestler Manisha Bhanwala : पिता की मौत का दर्द सीने में दबाकर उनकी मौत के कुछ घंटे ही वो मैट पर उतर गई थी और आज इस बेटी ने कुश्ती में विश्व चैंपियन बनकर अपने पिता को सच्ची श्रद्धांजलि दी है। हरियाणा के जींद सिवाहा गांव में 10 जनवरी 1997 को मनीषा का साधारण किसान परिवार में हुआ। करीब 13 साल पहले साल 2013 में सिवाहा गांव की मनीषा भनवाला को कुश्ती के मैदान में उतारने की प्रेरणा उनके पिता सुरेश ने दी थी।
दुर्भाग्य से जब मनीषा ने पहलवान के रूप में अपनी पहचान बनानी शुरू की, तभी उनके पिता का निधन हो गया। दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ था। साल 2022 में एशियाई चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए मंगोलिया रवाना होने के लिए मनीषा जब हरियाणा के जींद जिले के सिवाहा गांव स्थित अपने घर से निकली थीं, उसके कुछ घंटे बाद ही उनके पिता इस दुनिया को अलविदा कह गए।
पिताजी के निधन के बाद वे वापस घर आई और खेल छोड़ने का मन बना लिया था। क्योंकि मनीषा परिवार में अपने पिता के सबसे करीब थी और बुरी तरह से टूट गई थी। लेकिन परिवार वालों ने उसे समझाकर उसी दिन चैंपियनशिप में खेलने के लिए भेज दिया था। एक तरफ पिता को खोने का गहरा दुख था और दूसरी तरफ देश के लिए खेलने की जिम्मेदारी। मनीषा ने हिम्मत नहीं हारी और प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंची। उन्होंने कांस्य पदक जीतकर अपने पिता के सपने की दिशा में पहला बड़ा कदम बढ़ाया।
चार साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन 29 वर्षीय पहलवान का मानना है कि उनके पिता आज भी उनके साथ हैं और जरूरत पड़ने पर उनका मार्गदर्शन करते हैं। शुक्रवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ। कजाखस्तान के अस्ताना में जारी विश्व चैंपियनशिप में 59 किग्रा भार वर्ग के फाइनल में अमेरिका की अबीगैल नेत्ते हराकर मनीषा ने इतिहास रच दिया। बड़े भाई कबड्डी खिलाड़ी रिंकू ने भी उन्हें रोहतक की प्रसिद्ध चौधरी छोटूराम कुश्ती अकादमी में दाखिला दिलाने में मदद की।
मनीषा ने 2016 में कैडेट विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।
2016 के दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक हासिल किया। 2017 की कामनवेल्थ कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। 2018 में विश्व सैन्य खेलों में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। 2022- 2023 और 2024 की एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीते। 2023 और 2025 में राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक जीते। मार्च 2025 में जार्डन के अम्मान में एशियन कुश्ती चैंपियनशिप के 62 किलोग्राम वर्ग में उत्तर कोरिया की खिलाड़ी को 8-7 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह उनके करियर की सबसे यादगार उपलब्धियों में से एक रही।
एशियन गेम्स में क्वार्टर फाइनल में मिली थी हार
अंतरराष्ट्रीय पहलवान मनीषा भानवाला एशियन गेम्स में पदक जीतने से चूक गई थी। जापान में आयोजित प्रतियोगिता में मनीषा ने महिलाओं के 57 किलोग्राम भार वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन क्वार्टर फाइनल में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालांकि पहले मुकाबले में शानदार जीत
मनीषा ने अपने अभियान की शुरुआत दक्षिण कोरिया की पहलवान क्वोन यंगजिन को 8-0 से हराकर की। क्वार्टर फाइनल में मनीषा का सामना जापान की अकारी फुजिनामी से हुआ। इस मुकाबले में जापानी पहलवान ने मनीषा को 3-0 से पराजित कर दिया। इस हार के साथ मनीषा का एशियन गेम्स में पदक जीतने का सपना अधूरा रह गया।
दादा के निधन के बाद आठ साल की उम्र में पिताजी ने संभाला परिवार
मनीषा के भाई रिंकू ने बताया कि परिवार की स्थिति ज्यादा बेहतर नहीं थी। लेकिन पिताजी ने छोटे से किसान होते हुए भी हम भाई- बहनों को आगे बढ़ाने में कोई कमी नहीं छोड़ी। जब पिता सुरेश आठ साल के थे, तब दादाजी का निधन हो गया था। उसके बाद पिताजी ने ताऊ जी के साथ मिलकर परिवार की जिम्मेदारी संभाली। खेती की और उनसे छोटे भाईयों को पढ़ाया। दादी कमला देवी ने उनका पूरा साथ दिया। उनके चाचा सत्यवान डाक्टर हैं। दूसरे चाचा कुरुक्षेत्र में गाड़ियों के लेनदेन का कार्य करते हैं। अब परिवार की स्थिति ठीक है। रिंकू खुद सर्कल कबड्डी खेलने के साथ- साथ पिल्लूखेड़ा में रूद्र सप्लीमेंट के नाम से दुकान चलाते हैं। बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। मां मीना देवी हाउस वाइफ हैं।