Manisha Bhanwala : गोल्ड मेडल जीतने पर भाई बोले-लगता है पिता फिर जिंदा हो गए
Wrestler Manisha Bhanwana : सीनियर कुश्ती विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली हरियाणा के जींद की बेटी मनीषा भनवाला के भाई रिंकू ने कहा मनीषा के गोल्ड जीतने पर ऐसा लगता है कि उनके पिता सुरेश फिर से जिंदा हो गए हैं। उन्होंने कहा कि गांव में कबड्डी के खेल होते थे। रिंकू भी कबड्डी खेलता था तो उसे देखकर मनीषा ने भी कुश्ती खेलने की बात अपने पिता से कही।
बेटी को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए पहले निडानी स्पोर्ट्स एकेडमी भेजा गया। इसके बाद रोहतक के छोटू राम स्टेडियम में अभ्यास शुरू किया। एशियन गेम्स में वह हार गई थी। इसके बाद विश्व चैंपियनशिप में उसने रिक्वरी की और गोल्ड जीता, जिससे परिवार में खुशी का माहौल है।
रिंकू ने कहा कि पिता सुरेश ने तीनों भाई-बहनों को किसी प्रकार की कमी रहने नहीं दी। उनमें सबसे बड़ी बहन रेनू हैं, शिलाखेड़ी गांव में विवाहित है। इसके बाद रिंकू और फिर मनीषा आती है। मामा जितेंद्र ने भी उनकी पूरी मदद की। वह पिता की बहुत लाडली थी। पिता का 2022 में देहांत हो गया था।
उनका सपना था कि बेटी देश के लिए गोल्ड मेडल लेकर आए। जब मनीषा विश्व चैंपियनशिप में खेलने गई थी तो उनके पिता की फोटो टी शर्ट पर बनवाई थी। जब वह जीतेगी तो वह टी शर्ट पहनकर दिखाएगी, जिस पर उसके पिता की फोटो लगी हुई है। रिंकू ने कहा कि ऐसा लगता है कि उसकी वजह से आज पिता फिर से जिंदा हो गए हैं।
जब दादा टेकचंद का देहांत हो गया था, तब उनके पिता सुरेश की उम्र मात्र आठ साल की थी। उनके पिताजी चार भाई हैं, जिसमें सबसे बड़े ताऊ तेज सिंह, फिर पिता सुरेश, उसके बाद चाचा रमेश और चाचा डा. सत्यवान हैं।
पिताजी के चारों भाइयों में एक-एक एकड़ जमीन हिस्से में आती है। परिवार खेती से जुड़ा था। दादा जी के गुजर जाने के बाद पिता सुरेश ने परिवार की जिम्मेदारी को समझते हुए 11 साल की उम्र में हल थाम लिया था। रिंकू ने कहा कि उनके मामा जितेंद्र ने उनका पूरा साथ दिया।
भाइयों के लिए बहन होती है प्यारी
रिंकू ने कहा कि भाई के लिए बहन बहुत प्यारी होती है। वह तो यही कहेंगे कि अपनी बहनों को आगे बढ़ृाओ और खेलों में भाग लेने के लिए प्रेरित करें। जो पढ़ना चाहती है उसे पढ़ाओ। अगर आप बेटी या बहन के लिए थोड़ा बहुत प्रयास करते हो तो वह इससे ज्यादा मेहनत करती है ताकि अपने परिवार के सपनों को पूरा कर सके।