{"vars":{"id": "141324:5161"}}

Kokila Kaushik : आंखों से नहीं दिखता लेकिन फिर भी जूड़ो में रचा इतिहास, जीता सिल्वर मेडल

 

Japan Asian games Kokila Kaushik : जापान में चल रहे पैरा एशियन खेलों में जींद के कहसून गांव की बेटी कोकिला कौशिक ने जूड़ो में सिल्वर मेडल जीता है। दृष्टिबाधित कोकिला पिछले 8 सालों से जूड़ो की प्रेक्टिस कर रही हैं। कोकिला का परिवार फिलहाल हिसार में रह रहा है। उनके पिता कृष्ण कौशिक स्कूल लैक्चरर हैं जबकि मां सुमन सोशल वर्कर है। 

कोकिला रेसलर बनना चाहती थी लेकिन पैरा खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेसलिंग नहीं थी, इसलिए उसने जूड़ो खेलना शुरू किया। कोकिला की बड़ी बहन सफलता कौशिक जूड़ो में राज्य स्तर तक खेल चुकी है, इसलिए बड़ी बहन से ही जूड़ो सीखने की शुरूआत की।

इसके बाद लगातार अभ्यास करते हुए कोकिला राष्ट्रीय स्तर पर 9 गोल्ड मेडल जीत चुकी है और वह देश की पहली जूड़ो पैरा ओलंपियन है। फिलहाल ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही कोकिला 14 साल की उम्र से ही जूड़ो खेल रही हैं।

कोकिला ने साल 2019 में कॉमनवेल्थ खेलों में जूड़ो में सिल्वर मेडल जीता था। इसके बाद 2022-23 में चीन में हुए एशियन पैरा खेलो में कोकिला ने ब्राँज मेडल जीता और इस बार अपनी मेहनत के दम पर ब्राँज मेडल को सिल्वर में बदल दिया। कोकिला के पिता कृष्ण कौशिक ने बताया कि कोकिला जन्म से ही दृष्टिबाधित है।  

कहसून गांव के सरपंच श्रीकांत ने कहा कि गांव की बेटी ने सिल्वर मेडल जीता है और पूरे गांव को बेटी पर गर्व है। जापान से वापस लौटने के बाद कोकिला को गांव में सम्मानित किया जाएगा।