New Metro Project : हरियाणा में मेट्रो विस्तार को मिली मंजूरी, 300 दिन में तैयार होगा नया कॉरिडोर, 1662 करोड़ मंजूर
केंद्र सरकार द्वारा विकास की नई परियोजनाओं को हरियाणा पर फोकस किया जा रहा है। दिल्ली एनसीआर में सबसे ज्यादा विस्तार हरियाणा की तरफ किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत हरियाणा में मेट्रो के विस्तार की मंजूरी दी गई है। इस मेट्रो ट्रेन विस्तार का खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए मात्र 300 दिन यानी यानी एक साल से भी कम का समय दिया गया है।
इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार की तरफ से टेंडर निकाल दिया है। इसके अलावा टेंडर निकालने से पहले ही इस प्रोजेक्ट में आने वाले वन विभाग के पेड़ों की भी गणना कर ली गई है और यह प्रोजेक्ट तय समय में पूरा हो सके इसलिए इन पेड्रों को काटने की अनुमति वन विभाग से मांगी जा चुकी है। यह मेट्रोल प्रोजेक्ट गुरुग्राम के सेक्टर-9 से शुरू होगा और शहर के मुख्य जगहों से होते हुए डीएलएफ साइबर सिटी तक पहुंचेंगा।
मेट्रो के दूसरे चरण के निर्माण के लिए करीब 1662 करोड़ रुपये का टेंडर जारी हो चुका है। 18 नवंबर को इसकी तकनीकी बोली खोली जाएगी। टेंडर आवंटन के बाद 300 दिनों में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रस्तावित कारिडोर सेक्टर-9 से शुरू होकर सेक्टर-7, सेक्टर-4, सेक्टर-5, रेलवे स्टेशन, अशोक विहार, सेक्टर-3, बजघेड़ा रोड, पालम विहार एक्सटेंशन, पालम विहार, सेक्टर-23ए, सेक्टर-22, सेक्टर-21 और उद्योग विहार फेज-1 से होते हुए डीएलएफ साइबर सिटी तक पहुंचेगा।
बता दें कि फिलहाल प्रथम चरण का काम मिलेनियम सिटी सेंटर गुरुग्राम मेट्रो स्टेशन के आगे से लेकर सेक्टर-9 तक चल रहा है। हीरो होंडा चौक तक के भाग में काफी पिलर भी तैयार हो चुके हैं। टेंडर की प्रक्रिया पूरी होते ही दूसरे चरण का काम शुरू हो जाए, इसे ध्यान में रखकर तैयारी की जा रही है।
414 पेड़ों को हटाने की तैयारी
ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो के दूसरे चरण के निर्माण के लिए 414 पेड़ हटाने की तैयारी शुरू हो गई है। गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) के सर्वे में कारिडोर के रास्ते में आने वाले इन पेड़ों को चिह्नित किया गया है। जीएमआरएल की सलाहकार ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) से वन विभाग के माध्यम से पेड़ों की कटाई की अनुमति लेने की प्रक्रिया पूरी कराने का आग्रह किया है।
मेट्रो के पहले चरण में करीब 1800 पेड़ प्रभावित हो रहे थे। निर्माण कार्य में देरी के कारण पेड़ों की कटाई की अनुमति मिलने में भी विलंब हुआ था। दूसरे चरण में ऐसी स्थिति से बचने के लिए जीएमआरएल ने निर्माण शुरू होने से पहले ही प्रक्रिया आगे बढ़ानी शुरू कर दी है।
सर्वे में सबसे अधिक 68 कीकर के पेड़ चिह्नित किए गए हैं। इसके अलावा 65 नीम, 49 बकेन, 42 पापड़ी, 33 सिरस, 20 शहतूत, 11 पीपल और छह बरगद के पेड़ शामिल हैं। आम, अमलतास, आंवला, अमरूद, अशोक, बेलपत्र, बेरी, चंपा और फाइकस समेत अन्य प्रजातियों के पेड़ भी कारिडोर के रास्ते में आ रहे हैं। इन पेड़ों को हटाने के लिए वन विभाग की अनुमति जरूरी होगी।