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सुपरफास्ट गति का नया दौर, हरियाणा के साथ 5 राज्यों को एक साथ कनेक्ट करेगा यह नया एक्सप्रेसवे 

सिरसा, जोधपुर-बाड़मेर होते हुए अमृतसर तक तेज रफ्तार का नया अध्याय लिाने जा रहा है। वहीं दिल्ली से इसकी कनेक्टिविटी की बात की जाए तो दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के रास्ते अमृतसर-जामनगर इकोनॉमिक कॉरिडोर को जोड़ रहा है।
 

NEW EXPRESSWAY : देश में लगातार बन रहे हाईवे के कारण राज्यों और बड़े शहरों की दूसरी को छोटा कर दिया है। इसी कड़ी में गुजरात के जामनगर से पंजाब के अमृतसर तक जाता है। इसका निर्माण अंतिम चरण में है। इससे सड़क मार्ग से यह करीब 22 घंटे का सफर महज 13 घंटे में पूरा हो जाएगा।
 


यह एक्सप्रेसवे गुजारत, राजस्थान, हरियाणा होते हुए 5 राज्यों को पंजाब से जोड़ेगा। दरअसल जामनगर और अमृतसर दोनों ही सीमावर्ती क्षेत्र हैं, ऐसेे में यह हाईवे रणनीतिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है। इस मार्ग से दिल्ली से भी जामनगर होते हुए महज 16 घंटे में पहुंचा जा सकता है। 

 

इस एक्सप्रेसवे के रूट की बात की जाए तो यह जामनगर से  सिरसा, जोधपुर-बाड़मेर होते हुए अमृतसर तक तेज रफ्तार का नया अध्याय लिाने जा रहा है। वहीं दिल्ली से इसकी कनेक्टिविटी की बात की जाए तो दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के रास्ते अमृतसर-जामनगर इकोनॉमिक कॉरिडोर को जोड़ रहा है।

 

1257 किलोमीटर की दूरी


जामनगर-अमृतसर इकोनॉमिक कॉरिडोर की बात की जाए तो यह अंतिम चरण में है। यह हाईवे हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और पंजाब से होते हुए कुल 1257 किलोमीटर लंबा है। इस पर करीब 80 हजार करोड़ रुपये का कर 6 लेन का इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाया गया है। यह कॉरिडोर उत्तर भारत को सीधे गुजरात के बंदरगाहों से जोड़ता है।


 

इस हाईवे के तहत 637 किलोमीटर हिस्सा अकेले राजस्थान राज्य में है। राजस्थान का हिस्सा पूरी तरह से शुरू हो चुका है। अब उम्मीद है कि इसी साल दिसंबर तक हरियाणा और पंजाब के साथ-साथ गुजरात का बाकी हिस्सा भी शुरू कर दिया जाएगा।

 

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI द्वारा इसी एक्सप्रेसवे एक हिस्से को खोल दिया गया है। यह 27 किलोमीटर का हिस्सा देवगढ़ से गुजरात सीमा तक शुरू हो गया है। इसके अलावा इसी रूट का हिस्सा गुरुग्राम सेक्शन भी वाहनों के लिए खाेला जा चुका है। 

यूं घटेगी दूरी 

दरअसल यह कॉरिडोर शुरू होने से देश के दो महत्वपूर्ण शहर तो आपस में जुड़ ही जाएंगे, इसके अलावा राज्यों के बीच भी कनेक्टिविट बेहतर होगी। यानी इस रूट से दिल्ली के रास्ते जयपुर, उदयपुर से अहमदाबाद होते हुए जामनगर तक पहुंचने में करीब 16 घंटे का समय लगेगा। जबकि फिलहाल यह सफर करीब 26 घंटे का है। 


 

इसके अलावा दिल्ली से अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे तक पहुंच के लिए दो विकल्प रहेंगे। इसमें दिल्ली में KMP के जरिये या फिर NH-44 होते हुए वेस्टर्न पेरिफेरल या फिर हरियाणा के रोहतक होते हुए ट्रांस-हरियाणा एक्सप्रेसवे का रास्ता लिया जा सकता है। यहां से सिरसा-डबवाली इंटरचेंज के जरिये अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे की पहुंच मिलेगी।

 

वहीं वर्तमान में निर्माणाधीन दिल्ली–अमृतसर–कटरा एक्सप्रेसवे के रास्ते भी यहां पहुंचा जा सकता है। क्योंकि दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस वे दिल्ली से सीधे पंजाब के संगरूर-मोगा के पास लुधियाना-बठिंडा एक्सप्रेसवे लिंक से से अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे पर जाया जा सकता है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के रास्ते जयपुर-पचपदरा, जोधपुर लिंक भी जामनगर एक्सप्रेसवे को जोड़ रहा है।

 


917 किलोमीटर हिस्सा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे
इस रूट का 917 किलोमीटर हिस्सा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के रूप में रहेगा। क्योंकि इस राजमार्ग का पंजाब में 155 किलोमीटर का हिस्सा टिब्बा गांव से मोगा, धरमकोट, बठिंडा से होकर संगत कलां तक है। इसके बाद हरियाणा में 85 किलोमीटर का हिस्सा है, जो पंजाब सीमा के मंडी डबवाली से चौटाला गांव तक  है। वहीं राजस्थान की बात की जाए तो यहां पर इस हाईवे का 637 किलोमीटर का रूट आता है। यह रूट हनुमानगढ़, सूरतगढ़, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, बाड़मेर, सांचौर और जालोर से निकाला गया है। जबकि गुजरात में 380 किलोमीटर का हिस्सा थराद, वासरदा, राधनपुर, संतलपुर, मालिया के रास्ते जामनगर तक जोड़ता है।


 


एनएचएआई के अनुसार इस कॉरिडोर का 917 किलोमीटर हिस्सा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे रहेगा। जो हनुमानगढ़ से गुजरात सीमा तक और इसके बाद राजस्थान का पूरा हिस्सा इसमें आता है। यहां पर वाहनों की गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी।

 

रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद अहम


यह हाईवे रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद अहम रहने वाला है। क्योंकि इसका जुड़ाव गुजरात की दो महत्वपूर्ण बंदरगाहों कांडला और मुंद्रा पोर्ट तक होने वाला है। ऐसे में लॉजिस्टिक्स के लिए यह हाईवे लागत घटाने वाला होगा। इसके अलावा बाड़मेर रिफाइनरी से भी यह जुड़ रहा है। राजस्थान, गुजरात और पंजाब के पर्यटन के लिए भी यह कॉरिडोर काफी अहम होने वाला है।