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Ganga Link Expressway: शुरू हुआ 90KM लंबे लिंक एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण का काम, खर्च होंगें 7488 करोड़ रूपए, कई हाईवे से मिलेगी सीधी कनेक्टिवटी 

इस परियोजना के लिए 7488 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इससे जहां मध्य उत्तर प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी होगी, वहीं देश के कई बड़े महानगरों तक पहुंचना भी काफी आसान हो जाएगा।
 

Ganga Expressway: देश के दो महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए अब एक नया लिंक एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा। 90 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे देश के कई महानगरों को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस एक्सप्रेस वे का निर्माण जल्द ही शुरू हो सकता है। क्योंकि इसके लिए सरकार द्वारा जमीन का बैनामा प्रक्रिया तेजी से की जा रही है।

इस लिंक मार्ग से गंगा एक्सप्रेसवे व आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे आपस में जुड़ जाएंगे। इसको लेकर उत्तर प्रदेश द्वारा निर्माण एजेंसी को तीन वर्ष में कार्य पूरा कराने का निर्णय लिया गया है। इतना ही नहीं इसका निर्माण करने वाली एजेंसी का लाइबिलिटी पीरियड 5 साल का रहेगा। यानी इस रोड के निर्माण के बाद इसका रखरखाव 5 साल तक उसी एजेंसी द्वारा किया जाएगा।

यहां होगा जुड़ाव


इस परियोजना के तहत इस 90 किलोमीटर लंबे इस लिंक रोड का निर्माण किया जाना है। यह नया एक्सप्रेसवे  हरदोई जिला में सवायजपुर के पास गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा। वहीं इसको दूसरी तरफ इटावा के कुदरेल के पास आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ कर नया लिंक बनाया जाएगा।

अन्य कनेक्टिविटी में भी मिलेगा लाभ


इस 90 किलोमीटर लंबे लिंक एक्सप्रेसवे के बनने से गंगाएक्सप्रेसवे और लखनऊ- आगरा एक्सप्रेसवे तो जुड़ेंगे ही, साथ ही यह बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे को भी जोड़ने का काम करेगा। ऐसे में क्षेत्र को प्रदेश भर से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। 

जमीन के लिए तेजी से चल रही प्रक्रिया
यह लिंक एक्सप्रेसवे तैयार करने के लिए प्रशासन द्वारा जमीन की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है। इसके तहत जमीन अधिग्रहित करने के लिए विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं। इससे करीब 90 प्रतिशत जमीन का बैनामा भी हो चुका है। अब जो किसान इस परियोजना के लिए जमीन देने को तैयार नहीं हैं, उनसे जमीन लेने के लिए प्रक्रिया की जा रही है।

7488 करोड़ रुपये होंगे खर्च 


इस परियोजना के लिए 7488 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इससे जहां मध्य उत्तर प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी होगी, वहीं देश के कई बड़े महानगरों तक पहुंचना भी काफी आसान हो जाएगा। अब इस एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए एजेंसी का चयन हो चुका है और जैसे ही सरकार यह परियोजना एजेंसी को देती है, इसके तीन साल के भीतर ही यह काम पूरा करना होगा।