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खूबसूरती में बॉलीवुड एक्ट्रेस को मात देती है ये IPS अधिकारी, 5वीं फेल नेहा ने कैसे क्रेक किया UPSC, जानें 

UPSC Success Story : नेहा ब्याडवाल के जीवन में कई ऐसी परेशानियां आई, जिन्होंने उनकी राहत रोकने का प्रयास किया। भाषा की परेशानी के कारण वे पांचवीं कक्षा में फेल भी हो गईं थी।
 

Upsc Success Story : सफलता की राहत परेशानियों से होकर ही गुजरती है। शायद IAS नेहा ब्याडवाल के जीवन की कहानी यही कह रही है।

 

क्योंकि शैक्षणिक जीवन में इतनी परेशानियां झेली, जिनका कोई अंत नहीं। इसके बावजूद हार नहीं मानी और आखिरकार IAS बन कर ही दम लिया।

 

नेहा ब्याडवाल के जीवन में कई ऐसी परेशानियां आई, जिन्होंने उनकी राहत रोकने का प्रयास किया। भाषा की परेशानी के कारण वे पांचवीं कक्षा में फेल भी हो गईं थी।

इसके बाद मेहनत जारी रखी और कॉलेज में टॉप कर स्वयं को साबित कर दिया। इसके बाद  UPSC की यात्रा में भी 3 बार असफलता हाथ लगी, लेकिन इससे हार मानने की बजाए मेहन का रास्ता अपनाया।

इसके बाद चौथे प्रयास में 569 की रैंक प्राप्त की औ IAS के पद तक पहुंच गई।

पिता से प्रेरित होकर चुनी यूपीएससी की राह


नेहा ब्याडवाल के पिता श्रवण कुमार आयकर विभाग में अधिकारी हैं। ऐसे में उनके जीवन में पिता के व्यवसाय का काफी प्रभाव पड़ा।

इससे नेहा को प्रेरणा मिली और सिविल सेवा की राह चुन ली। हालांकि यूपीएसी की परीक्षा के दौरान लगातार असफलताएं मिली, लेकिन पिता को बेटी की मेहनत पर पूरा भरोसा था। इसलिए हमेशा हौसला दिया और आखिरकार जीत हुई।

असफलता से खुला सफलता का रास्ता


नेहा के जीवन में बेशक असफलताएं आती रही, लेकिन इससे जीवन में सफलता का रास्ता खुला है। क्योंकि उन्होंने असफलताओं से हार मानने की बजाय संघर्ष किया।

क्योंकि यूपीएसी के अपने सफर में नेहा को काफी परेशानियां हुई। पहले दो प्रयासों में तो वे  प्रीलिम्स तक पास नहीं कर पाई।  

जब तीसरी बार परीक्षा देकर प्रीलिम्स पास किया तो आंसर राइटिंग में कमी रह गई और मेंस से चूक गई। परिणाम स्वरूप फिर से वे सफलता आठ अंक दूर रह गई। 

फिर ऐसे की तैयारी, दूर की बाधा


तीसरे प्रयास के बाद नेहा ने आंसर राइटिंग की कमी को दूर करने का फैसला लिया। इसके लिए मजबूत इरादों के साथ-साथ परिवार का भी साथ मिला।

इसमें छोटे भाई ने काफी साथ दिया। क्योंकि जब नेहा आंसर राइटिंग की प्रेक्टिस करती तो उनका भाई स्टॉपवॉच लेकर टाइमिंग जांचता।

यह अभ्यास लगातार चलता रहा और इस परेशानी को पछाड़ दिया। इसके बाद जब चौथे प्रयास में परीक्षा दी तो सफलता मिली।