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फिल्म के सेट पर इस एक्ट्रेस की हंसी रोक देती थी शूटिंग, काला पानी के सेट पर देव आनंद भी हैरान....

 

Kala Pani film : पुराने दशक की एक एट्रेस फिल्म के सेट पर इतना खिलखिलाकर हंसती थी कि शूटिंग रोकनी पड़ती थी। उस समय के मशहूर एक्टर देव आनंद भी इस हंसी को देख कर हैरान रह गए थे। हम बात कर रहे हैं मधुबाला की हंसी और काला पानी फिल्म के सेट की। 

1958 में रिलीज हुई देव आनंद और मधुबाला की फिल्म ‘काला पानी’ आज भी हिंदी सिनेमा की यादगार फिल्मों में शुमार है। शानदार कहानी, बेहतरीन अभिनय और सदाबहार संगीत से सजी इस फिल्म के कई किस्से आज भी लोगों को रोमांचित करते हैं। फिल्म की शूटिंग के दौरान मधुबाला की खिलखिलाती हंसी कई बार परेशानी का कारण बन जाती थी।

वह कैमरे के सामने भी हंसने लगती थीं और शूटिंग रोकनी पड़ती थी। देव आनंद उनकी स्वाभाविक सुंदरता के भी कायल थे। आइए जानते हैं फिल्म ‘काला पानी’ से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से, जो आज भी दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान ला देते हैं।

मधुबाला की हंसी से कई बार रुक जाती थी 'काला पानी' की शूटिंग
1958 में रिलीज हुई देव आनंद की फिल्म 'काला पानी' हिंदी सिनेमा की उन फिल्मों में शामिल है, जिन्हें उनकी कहानी शानदार कलाकारों और यादगार संगीत के लिए आज भी याद किया जाता है। राज खोसला के निर्देशन में बनी इस फिल्म में देव आनंद के साथ मधुबाला ने लीड रोल प्ले किया था।

'काला पानी' की कहानी अंग्रेजी लेखक एजे क्रोनिन के उपन्यास 'बियॉन्ड दिस प्लेस' से प्रेरित थी। इस उपन्यास पर 1955 में बंगाली फिल्म 'सबार उपरे' भी बनाई गई थी । देव आनंद के मुताबिक, मधुबाला छोटी-छोटी बातों पर हंसने लगती थीं। कई बार कैमरे के सामने दृश्य करते समय भी उन्हें हंसी आ जाती थी। वह इतनी देर तक हंसती रहती थीं कि शूटिंग रोकनी पड़ती थी।

ऐसे मौकों पर रोशनी बंद कर दी जाती थी और उनके लिए चाय मंगाई जाती थी, ताकि वह खुद को संभाल सकें और फिर से दृश्य की शूटिंग शुरू हो सके। देव आनंद ने मधुबाला को बेहद स्वाभाविक सुंदरता वाली एक्ट्रेस बताया था। मधुबाला को खूबसूरत दिखने के लिए भारी मेकअप, नकली पलकों या दूसरे दिखावटी साधनों की जरूरत नहीं होती थी।